India Bank Credit: जून 2026 में 18.6% उछला, रिटेल और NBFC की मांग सबसे आगे

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Bank Credit: जून 2026 में 18.6% उछला, रिटेल और NBFC की मांग सबसे आगे

जून 2026 में भारत में बैंक क्रेडिट में साल-दर-साल **18.6%** की बढ़ोतरी देखी गई, जो **₹219 ट्रिलियन** तक पहुंच गया। यह तेजी रिटेल उधारकर्ताओं, NBFCs और रियल एस्टेट सेक्टर से मिली मजबूत मांग के कारण संभव हुई। हालांकि, यह कर्ज वृद्धि परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) को लेकर चिंताएं बढ़ा सकती है।

जून 2026 में बैंकिंग सेक्टर में दिखी जोरदार तेजी

भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने जून 2026 में क्रेडिट एक्टिविटी में एक बड़ी उछाल दर्ज की है। कुल बैंक क्रेडिट में पिछले साल के मुकाबले 18.6% की बढ़ोतरी हुई और यह अनुमानित ₹219 ट्रिलियन तक पहुंच गया। यह विस्तार दर्शाता है कि बैंक सक्रिय रूप से पूंजी लगा रहे हैं, जिसमें नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ भी 18.3% रही। यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों में पूंजी की व्यापक मांग को उजागर करता है।

रिटेल बॉरोइंग और कंज्यूमर ट्रेंड्स

रिटेल क्रेडिट इस ग्रोथ का एक प्रमुख जरिया बना हुआ है, जिसमें साल-दर-साल 15.8% की वृद्धि देखी गई। हाउसिंग लोन बैंक पोर्टफोलियो का एक स्थिर आधार बने हुए हैं, जिन्हें व्हीकल, ज्वेलरी और एजुकेशन लोन की लगातार मांग का सहारा मिला है। हालांकि, रिटेल सेगमेंट में प्रदर्शन एक समान नहीं है। कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन लगातार दबाव में हैं, और क्रेडिट कार्ड के बकाये में केवल 2% की धीमी वृद्धि देखी गई है। यह अंतर बताता है कि जहां परिवार बड़े कर्जों को लेकर आश्वस्त हैं, वहीं छोटे खर्चों के लिए कर्ज लेने की रफ्तार धीमी है।

NBFC और रियल एस्टेट सेक्टर में बूम

सर्विसेज सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ 21.4% रही, जिसमें नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) को दिए गए लोन में 32% की भारी बढ़ोतरी का बड़ा योगदान रहा। NBFCs अब कुल बैंक क्रेडिट का लगभग 10% हिस्सा हैं, जिससे उनकी वित्तीय सेहत बैंकिंग सेक्टर के समग्र जोखिम प्रोफाइल के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन गई है। इसके अलावा, कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर को दिया जाने वाला कर्ज साल-दर-साल 22% बढ़कर तेज हुआ है, जो डेवलपर्स की बढ़ी हुई गतिविधि और शहरी विस्तार को दर्शाता है।

इंडस्ट्रीज और MSME का योगदान

इंडस्ट्रियल क्रेडिट जून 2026 में 19.2% बढ़ा। इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए बढ़े हुए समर्थन से आया है। माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को क्रेडिट 23% बढ़ा, जबकि मीडियम इंडस्ट्रीज में 30% की वृद्धि देखी गई। यह विस्तार इंजीनियरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, पेट्रोलियम, बेसिक मेटल्स और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में केंद्रित है।

निवेशकों के लिए खास बातें

निवेशकों के लिए, यह तेज क्रेडिट ग्रोथ आर्थिक गतिविधि का एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ कुछ खास मॉनिटर करने योग्य बातें भी जुड़ी हैं। क्रेडिट की इतनी तेज वृद्धि कभी-कभी मार्जिन पर दबाव डाल सकती है, खासकर यदि बैंकों को इस ग्रोथ को फंड करने के लिए जमा दरों को बढ़ाना पड़े। इसके अलावा, NBFCs और कमर्शियल रियल एस्टेट लेंडिंग पर निर्भरता का मतलब है कि इन क्षेत्रों में किसी भी तरह की मंदी का असर अंततः बैंकिंग एसेट क्वालिटी पर पड़ सकता है। निवेशक आने वाले तिमाही नतीजों पर नजर रखेंगे कि क्या यह लोन ग्रोथ स्वस्थ नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) में बदल रही है और इन उधारदाताओं की फंड की लागत में कोई बदलाव आता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.