एक बड़ी राहत, पर कई सवाल?
यह आर्बिट्रेशन जीत, नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) की ऑपरेशनल इकाई IDRCL के लिए बेहद ज़रूरी थी। यह 'बैड बैंक' पहल की गति और कुशलता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच एक सकारात्मक खबर है। SPTPL के डेट के अधिग्रहण की लागत ₹117 करोड़ थी, और अब ₹691 करोड़ का अवार्ड मिलना, फँसे हुए एसेट्स (distressed assets) में छिपे मूल्य को दर्शाता है। हालांकि, यह अवार्ड शुरुआती अधिग्रहण मूल्यांकन (acquisition valuations) और इन्फ्रास्ट्रक्चर एसेट्स की रिकवरी में लगने वाले लंबे समय की जटिलताओं पर भी सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब सरकारी संस्थाएं भी इसमें शामिल हों।
अवार्ड के पीछे की कहानी
महाराष्ट्र सरकार द्वारा तत्काल ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया यह ₹691 करोड़ का अवार्ड, 2017 में Sion Panvel Tollways कंसेशन एग्रीमेंट (concession agreement) की समाप्ति से जुड़ा है। आर्बिट्रेटर जस्टिस JP Devadhar ने IDRCL के उस दावे को सही ठहराया जिसमें टर्मिनेटेड एग्रीमेंट के डेट पोर्शन के लिए हर्जाना मांगा गया था। IDRCL, जिसने 2024 में SPTPL का डेट ₹117 करोड़ में खरीदा था, के लिए यह अवार्ड एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सीधे तौर पर निवेश पर लगभग छह गुना रिटर्न दिखाता है, जो एक सफल, हालांकि लम्बी, रिकवरी का उदाहरण है।
क्यों है रिकवरी में इतनी देर?
यह जीत एक बड़े परिदृश्य में आती है जहाँ भारत के एसेट रिकंस्ट्रक्शन (asset reconstruction) स्पेस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। CRISIL की रेटिंग के अनुसार, एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) के लिए रिकवरी रेट में सुधार हो रहा है, और FY26 तक यह 75-80% तक पहुँच सकता है। लेकिन, एसेट्स के मूल्यांकन (pricing) में अंतर एक लगातार की समस्या बनी हुई है। बैंक आमतौर पर कैश फ्लो पर 12-13% का डिस्काउंट देते हैं, जबकि ARCs अपने कैपिटल कॉस्ट पर करीब 25% का डिस्काउंट दे सकते हैं, जिससे एसेट की बिक्री में बाधा आती है।
Sion Panvel Tollways खुद सालों से वित्तीय मुश्किलों में फंसा था और इसने ₹1,536 करोड़ के लोन पर डिफ़ॉल्ट किया था। प्रोजेक्ट पूरा न होने को लेकर महाराष्ट्र सरकार के साथ हुए विवादों के कारण 2017 में कंसेशन एग्रीमेंट को समाप्त कर दिया गया था, और SPTL को 2015-16 में NPA घोषित कर दिया गया था। SPTL का रेज़ोल्यूशन प्रोसेस, जिसमें NCLT की कार्यवाही और कई बिडिंग राउंड शामिल थे, बहुत लंबा खिंच गया। सरकारी संस्थाओं से डेट रिकवर करना अक्सर एक अनोखी चुनौती पेश करता है, क्योंकि सरकारी संस्थाओं की आर्बिट्रल अवार्ड्स (arbitral awards) का पालन करने की दर प्राइवेट पार्टियों की तुलना में कम होती है।
ऑपरेशनल दक्षता पर सवाल
यह बड़ा अवार्ड, NARCL और IDRCL की कार्यप्रणाली की दक्षता और लगने वाले समय को लेकर चिंताओं को और बढ़ाता है। स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन को तेज़ करने के लिए स्थापित होने के बावजूद, 'बैड बैंक' पहल को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है। NARCL अपने अधिग्रहण लक्ष्यों को पूरा करने में संघर्ष करता रहा है, FY23 में ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल ₹10,387 करोड़ का अधिग्रहण कर पाया। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स द्वारा NARCL (एसेट एग्रीगेटर) और IDRCL (रेज़ोल्यूशन मैनेजर) की दोहरी संरचना (dual structure) को ऑपरेशनल अक्षमता (operational inefficiency) और उच्च लागत का एक प्रमुख कारण बताया गया है। इसके अलावा, NARCL की सफलता अक्सर इसकी सिक्योरिटी रिसीट्स (Security Receipts) पर सरकारी गारंटी से जुड़ी होती है, जो बैंकों का भरोसा बढ़ाने के लिए है, लेकिन अंततः यह प्रभावी एसेट रेज़ोल्यूशन पर निर्भर करता है। यह मामला, विशेष रूप से राज्य सरकारों के शामिल होने पर, विवादों के समाधान में लगने वाले लंबे समय को उजागर करता है।
आगे का रास्ता
विश्लेषकों और इंडस्ट्री के जानकारों ने ऑपरेशन को सुव्यवस्थित करने और लागत कम करने के लिए IDRCL को NARCL के साथ मर्ज करने का सुझाव दिया है, हालांकि सरकार ने पहले प्रतिभा अधिग्रहण (talent acquisition) के लिए दोहरी संरचना के संभावित लाभों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया था। जैसे-जैसे ARCs रियल एस्टेट, थर्मल पावर और रोड जैसे क्षेत्रों द्वारा संचालित होकर अपनी रिकवरी दरों में सुधार कर रही हैं, उम्मीद है कि 2026 तक कुल रिकवरी दर 75-80% तक पहुँच जाएगी। NARCL की अपनी पोर्टफोलियो में, विशेष रूप से जटिल, राज्य-जुड़े मामलों में, लगातार ऐसी रिकवरी स्तर हासिल करने की क्षमता, उसकी दीर्घकालिक सफलता और भारत के डेट रेज़ोल्यूशन फ्रेमवर्क में विश्वास बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगी।