भारत का 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर **7.498%** पर पहुंच गया है, जो लगातार **11वें हफ्ते** की तेजी है। बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बाजार में दबाव है, हालांकि कई संस्थागत निवेशक इसे लंबी अवधि के निवेश का मौका मान रहे हैं।
बाजार पर दबाव क्यों?
देश के 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड का 7.498% पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि इकोनॉमी पर दबाव बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह $115 प्रति बैरल के आसपास चल रहे कच्चे तेल की कीमतें हैं। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए बढ़ते दाम सीधे महंगाई को हवा दे रहे हैं। इसके चलते मार्केट में यह उम्मीद पक्की हो गई है कि Reserve Bank of India (RBI) आने वाले समय में रेपो रेट और बढ़ा सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?
बॉन्ड मार्केट का एक सीधा नियम है: यील्ड बढ़ती है तो बॉन्ड की कीमतें घटती हैं। इस वजह से मौजूदा बॉन्डधारकों को नुकसान हो रहा है। लेकिन, यील्ड के 7.5% के स्तर को छूने के बाद अब बड़ी बीमा कंपनियां (Insurance Companies) इसे एक मौके की तरह देख रही हैं। जानकारों का मानना है कि मौजूदा कीमतों में महंगाई का काफी हद तक असर पहले ही दिख चुका है, जो इसे मीडियम टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए आकर्षक बनाता है।
क्या कहता है स्वैप मार्केट?
बाजार के अंदर दो राय है। स्वैप मार्केट का अनुमान है कि अगले एक साल में रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट्स की आक्रामक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्केट ओवर-रिएक्ट कर रहा है। बीमा कंपनियों के एनालिस्ट्स के मुताबिक, टर्मिनल रेपो रेट 6.00% से 6.25% के बीच स्थिर हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो बॉन्ड यील्ड आने वाले साल में 7.15% से 7.45% के दायरे में स्थिर हो सकती है।
जोखिम अभी बाकी हैं
निवेशकों को अभी भी सतर्क रहना होगा। अगर महंगाई और क्रूड ऑयल के दाम काबू में नहीं आते हैं, तो यील्ड 7.5% के पार जा सकती है, जिससे सरकार और कॉर्पोरेट जगत के लिए कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा। आगे चलकर RBI की पॉलिसी मीटिंग और महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
