इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने देश भर के करीब 8,000 रेस्टोरेंट्स में **₹25,000 करोड़** की बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी है। फूड डिलीवरी ऐप्स के डेटा और टैक्स फाइलिंग के मिलान से यह गड़बड़ी सामने आई है, जिससे अब असंगठित (unorganized) सेक्टर पर सख्ती बढ़ना तय है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2021-22 से लेकर 2024-25 के फाइनेंशियल इयर्स के बीच रेस्टोरेंट सेक्टर में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का पता लगाया है। विभाग की जांच में सामने आया है कि करीब 8,000 ऐसे रेस्टोरेंट्स हैं, जिन्होंने डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर तो बिजनेस दिखाया, लेकिन अपनी टैक्स रिटर्न फाइल करते समय आय को काफी कम करके पेश किया।
डिजिटल डेटा से खुली पोल
जांच में Swiggy और Zomato जैसे फूड एग्रीगेटर्स द्वारा काटे गए TDS रिकॉर्ड्स का मिलान रेस्टोरेंट्स की फाइलिंग से किया गया। अधिकारियों ने पाया कि कई रेस्टोरेंट्स ने डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स से होने वाली कमाई को तो छिपाया ही, साथ ही डाइन-इन (dine-in) से होने वाली बिक्री को भी गायब कर दिया। डाइन-इन का रेवेन्यू आमतौर पर डिलीवरी रेवेन्यू से 3 से 4 गुना अधिक होता है, जिससे कुल टैक्स चोरी का आंकड़ा ₹25,000 करोड़ के पार पहुंच गया।
संगठित सेक्टर को फायदा, छोटे रेस्टोरेंट्स पर दबाव
इस क्रैकडाउन का असर बाजार पर भी दिखेगा। लिस्टेड QSR (क्विक सर्विस रेस्टोरेंट) कंपनियां पहले से ही पूरी तरह टैक्स कंप्लायंट हैं, इसलिए उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ सालाना टर्नओवर वाले अनऑर्गेनाइज्ड रेस्टोरेंट्स अब मुश्किल में हैं। अगर इन्हें अपनी अकाउंटिंग को फॉर्मल करना पड़ा, तो इनके ऑपरेशनल खर्च बढ़ेंगे, जिससे बड़े रेस्टोरेंट चेन्स और छोटे ढाबों के बीच का कॉम्पिटिटिव गैप कम होगा।
चोरी का तरीका और भविष्य की कार्रवाई
जांच में पाया गया कि कई रेस्टोरेंट्स बिलिंग सॉफ्टवेयर से बिक्री का डेटा डिलीट कर रहे थे और डिजिटल पेमेंट को स्टाफ के पर्सनल अकाउंट्स में रूट कर रहे थे। पिछले मार्च में केवल 62 रेस्टोरेंट्स की जांच में ₹408 करोड़ की बिक्री छिपाने का मामला सामने आया था। विभाग ने अब चेतावनी दी है कि टैक्स न भरने वाले डिफॉल्टर्स पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
