InCred Wealth ने **$10 बिलियन** के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का माइलस्टोन हासिल कर लिया है। अब कंपनी थर्ड-पार्टी फंड्स बेचने के बजाय खुद के इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की तैयारी में है।
डिस्ट्रीब्यूशन से मैन्युफैक्चरिंग तक का सफर
CEO नितिन राव के नेतृत्व में InCred Wealth अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी को पूरी तरह बदल रही है। अभी तक कंपनी दूसरे के फंड्स बेचकर कमीशन कमाती थी, लेकिन अब वे अपने खुद के इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स (Proprietary Offerings) तैयार करने पर जोर दे रही है। यह कदम वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर में घटते मार्जिन के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
हाई-यील्ड एसेट्स पर फोकस
कंपनी का लक्ष्य अब ऐसे प्रोडक्ट्स पर है जो क्लाइंट्स को 13% से 15% तक का रिटर्न दे सकें। इसके लिए कंपनी प्राइवेट क्रेडिट और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस जैसे एसेट्स पर दांव लगा रही है। मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाने से कंपनी को फीस का एक बड़ा हिस्सा खुद रखने में मदद मिलेगी, जो पहले थर्ड-पार्टी क्रिएटर्स के साथ साझा करना पड़ता था।
रिस्क और चुनौतियां
इस बदलाव के साथ ही कंपनी का रिस्क प्रोफाइल भी बदल गया है। अब कंपनी केवल एक डिस्ट्रीब्यूटर नहीं, बल्कि एसेट मैन्युफैक्चरर बन गई है, जिससे अंतर्निहित संपत्तियों (Underlying Assets) की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी। साथ ही, SEBI जिस तरह से AIF और प्राइवेट क्रेडिट स्पेस पर कड़ी नजर रख रहा है, उसे देखते हुए अनुपालन (Compliance) और रिस्क मैनेजमेंट कंपनी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
बाजार में कड़ी टक्कर
InCred Wealth का सामना अब 360 ONE और Nuvama जैसे दिग्गज प्लेयर्स से है, जिनके पास पहले से ही अपना मजबूत प्रोडक्ट प्लेटफॉर्म मौजूद है। अब देखना यह होगा कि क्या InCred अपने क्लाइंट्स को इन नए प्रोडक्ट्स के जरिए लंबी अवधि तक जोड़े रख पाती है या नहीं।
