RBI के नए नियमों से महंगा हुआ करेंसी हेजिंग, इंपोर्टर्स ने लिया बड़ा रिस्क

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI के नए नियमों से महंगा हुआ करेंसी हेजिंग, इंपोर्टर्स ने लिया बड़ा रिस्क

RBI की लिक्विडिटी टाइटनिंग के कारण फॉरवर्ड प्रीमियम बढ़कर **8.5%** पर पहुंच गया है, जिसके चलते तेल कंपनियों समेत कई बड़े इंपोर्टर्स ने डॉलर हेजिंग से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।

प्रीमियम में उछाल का असर

भारतीय इंपोर्टर्स के लिए अब डॉलर का पेमेंट करना महंगा पड़ता जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा लिक्विडिटी घटाने के कदमों के चलते फॉरेक्स मार्केट में फॉरवर्ड प्रीमियम में 8.5% का भारी उछाल आया है। स्थिति यह है कि मार्केट में बिड-आस्क स्प्रेड (Bid-Ask Spread) बढ़कर 8 से 10 पैसे हो गया है, जिससे कंपनियों पर हर महीने 9 से 13 पैसे प्रति डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

कंपनियों की रणनीति और बढ़ता खतरा

अपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट को कम दिखाने के लिए, खासतौर पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अब फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स बुक करने से बच रही हैं। फिलहाल रुपया 95 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर है, जो कंपनियों को इस 'वेट एंड वॉच' रणनीति के लिए प्रेरित कर रहा है।

हालांकि, यह कदम भविष्य के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल रिस्क बन सकता है। अगर रुपया अचानक कमजोर होता है, तो इन कंपनियों के पास कोई सुरक्षा कवच (Hedging) नहीं होगा। ऐसी स्थिति में उन्हें स्पॉट मार्केट से डॉलर बहुत महंगी दरों पर खरीदने पड़ सकते हैं। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे आने वाली अर्निंग्स कॉल्स पर नजर रखें, ताकि यह पता चल सके कि कंपनियों के पास करेंसी में आने वाले झटकों को झेलने के लिए क्या तैयारी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.