ITAT Ruling: भारत आगमन के दिन को NRI स्टे काउंट से बाहर रखने का आदेश

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AuthorNeha Patil|Published at:
ITAT Ruling: भारत आगमन के दिन को NRI स्टे काउंट से बाहर रखने का आदेश

Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है कि भारत आने के दिन को टैक्स रेजिडेंसी कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जाएगा। यह फैसला उन NRIs के लिए बड़ी राहत है जो अब तक डबल-काउंटिंग की समस्या से जूझ रहे थे।

Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) दिल्ली ने नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए भारत में बिताए दिनों की गणना को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि भारत में जिस दिन व्यक्ति का आगमन होता है, उस दिन को टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस तय करने के लिए कुल दिनों की गिनती में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

क्या है विवाद और नियम?

भारतीय टैक्स कानूनों के तहत, यदि कोई व्यक्ति एक फाइनेंशियल ईयर में 182 दिन या उससे अधिक समय भारत में बिताता है, तो उसे टैक्स रेजिडेंट माना जाता है। अब तक टैक्स अथॉरिटीज अक्सर आने और जाने दोनों दिनों को कुल गिनती में जोड़ लेती थीं, जिसे 'डबल-काउंटिंग' कहा जाता है। इसके कारण कई लोगों के दिनों की संख्या अनजाने में 182 दिन की सीमा को पार कर जाती थी, जिससे वे अनपेक्षित टैक्स देनदारियों में फंस जाते थे।

ITAT का तर्क

ITAT ने 'General Clauses Act' के सिद्धांतों को लागू करते हुए पुष्टि की है कि किसी भी अवधि की गणना करते समय पहले दिन को छोड़ना आवश्यक है। यह व्याख्या उन लोगों के लिए गेम-चेंजर है जो काम के सिलसिले में अक्सर भारत यात्रा करते हैं। अब उनके लिए रेजिडेंट या नॉन-रेजिडेंट का स्टेटस तय करना अधिक स्पष्ट और सरल हो गया है।

सावधानी बरतना जरूरी

हालांकि यह एक महत्वपूर्ण कानूनी आधार है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कानून में कोई बदलाव नहीं बल्कि एक न्यायिक व्याख्या है। टैक्स विभाग अभी भी हर मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करने का अधिकार रखता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि NRIs केवल दिन गिनने पर निर्भर न रहें। अपने दावे को मजबूत करने के लिए पूरी तैयारी रखें:

  • पासपोर्ट एंट्री और एग्जिट स्टैम्प का रिकॉर्ड रखें।
  • बोर्डिंग पास, एयर टिकट और इमिग्रेशन रिकॉर्ड्स को संभाल कर रखें।
  • अपनी विदेश में रेजिडेंसी साबित करने के लिए एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स, विदेशी सैलरी स्टेटमेंट और वर्क परमिट जैसे दस्तावेज तैयार रखें।

याद रखें, टैक्स रेजिडेंसी केवल दिनों की संख्या से ही नहीं, बल्कि भारत के साथ आपके आर्थिक और व्यक्तिगत संबंधों से भी तय होती है, इसलिए अपना डॉक्यूमेंटेशन हमेशा अपडेट रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.