ITAT मुंबई ने Reliance Jio Infocomm को ₹11,003 करोड़ के टैक्स मामले में बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि ऑपरेशनल खर्चों को केवल अकाउंटिंग क्लासिफिकेशन के आधार पर कैपिटल एसेट नहीं माना जा सकता।
ट्रिब्यूनल का अहम फैसला
मुंबई स्थित ITAT (Income Tax Appellate Tribunal) ने असेसमेंट ईयर 2019-20 के लिए Reliance Jio के खिलाफ टैक्स विभाग द्वारा की गई ₹11,003 करोड़ की टैक्स डिमांड को खारिज कर दिया है। विवाद तब शुरू हुआ जब टैक्स अधिकारियों ने कंपनी के कुछ ऑपरेशनल खर्चों को 'कैपिटल आउटले' मानने की कोशिश की। विभाग का तर्क था कि चूंकि ये खर्च कंपनी की बुक्स में 'Capital Work-in-Progress' (CWIP) के तौर पर दर्ज थे, इसलिए इन्हें बिजनेस खर्च के बजाय कैपिटल इन्वेस्टमेंट माना जाना चाहिए।
क्यों मिली Reliance Jio को जीत?
ITAT बेंच ने टैक्स विभाग के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि फाइनेंशियल रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग लेबल टैक्स ट्रीटमेंट तय नहीं करते। कोर्ट ने पाया कि विवादित खर्च जैसे कर्मचारियों की सैलरी, बिजली-ईंधन बिल, इंटरकनेक्ट चार्जेज और रिपेयरिंग के खर्चे केवल नेटवर्क के रखरखाव और ऑप्टिमाइजेशन के लिए थे।
चूंकि ये खर्च नेटवर्क की क्वालिटी बनाए रखने के लिए थे न कि नई संपत्तियां बनाने के लिए, इसलिए इन्हें 'रेवेन्यू डिडक्शन' के रूप में माना जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी इन्हें अपने कुल मुनाफे में से घटाकर टैक्स का कैलकुलेशन कर सकती है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह फैसला कंपनी के कैश फ्लो और टैक्स पोजीशन के लिए एक बड़ी जीत है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है। टैक्स विभाग के पास इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने का विकल्प है। साथ ही, टेलीकॉम सेक्टर में GST इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे अन्य कानूनी मामले भी कंपनी पर दबाव बनाए रख सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के रेगुलेटरी और टैक्स संबंधी जोखिमों पर नजर बनाए रखें।
