Income Tax: सिर्फ डायरी की एंट्री पर नहीं लग सकता टैक्स, ITAT का बड़ा फैसला

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AuthorAditya Rao|Published at:
Income Tax: सिर्फ डायरी की एंट्री पर नहीं लग सकता टैक्स, ITAT का बड़ा फैसला

ITAT अहमदाबाद ने **₹33.5 लाख** के टैक्स एडिशन को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि केवल हाथ से लिखी डायरी की एंट्री को 'अनएक्सप्लेन्ड एक्सपेंडिचर' नहीं माना जा सकता।

मामला क्या था?

ITAT अहमदाबाद ने असेसमेंट ईयर 2012-13 से जुड़े एक मामले में करदाता को बड़ी राहत दी है। आयकर विभाग ने धारा 69C के तहत डायरी की एंट्रीज को आधार बनाकर ₹33.50 लाख का टैक्स डिमांड किया था। विभाग का मानना था कि ये एंट्रीज बिना किसी स्पष्ट आय के किए गए खर्चे हैं। लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

'टेलीस्कोपिंग' सिद्धांत का इस्तेमाल

ट्रिब्यूनल के फैसले में 'टेलीस्कोपिंग' (Telescoping) सिद्धांत ने अहम भूमिका निभाई। करदाता ने तर्क दिया कि ये पैसे उनके ससुर से मिले थे, जो उनके साथ ही रहते थे। सबूत के तौर पर ससुर द्वारा बैंक से किए गए कैश विड्रॉल (Cash Withdrawals) का रिकॉर्ड पेश किया गया। आंकड़े चौंकाने वाले थे—सिर्फ एक साल में ₹1.16 करोड़ का कैश निकाला गया था, और 2009-10 से 2020-21 के बीच यह कुल राशि लगभग ₹6.72 करोड़ थी। ट्रिब्यूनल ने माना कि यह पुख्ता सबूत है कि खर्चों का स्रोत परिवार का पैसा ही था, न कि कोई अवैध आय।

क्यों जरूरी है ऑडिट ट्रेल?

यह फैसला स्पष्ट करता है कि टैक्स असेसमेंट के दौरान सबूतों का वजन कितना मायने रखता है। भले ही ट्रिब्यूनल ने करदाता को राहत दी हो, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि केवल मौखिक या अनौपचारिक स्पष्टीकरण काम नहीं आते।

टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए एक मजबूत 'ऑडिट ट्रेल' (Audit Trail) होना अनिवार्य है। बैंक स्टेटमेंट और कैश विड्रॉल के रिकॉर्ड्स किसी भी टैक्स विवाद से बचने का सबसे प्रभावी तरीका हैं। भविष्य में ऐसी दिक्कतों से बचने के लिए परिवार के बीच होने वाली वित्तीय मदद का भी एक लिखित और दस्तावेजी इतिहास रखना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.