Hyderabad ITAT ने एक टैक्सपेयर की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपनी कैपिटल गेन्स की लायबिलिटी को पति पर शिफ्ट करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने साफ कहा है कि कानून की 'क्लबिंग' धाराओं का इस्तेमाल टैक्स चोरी या देरी के लिए ढाल की तरह नहीं किया जा सकता।
Hyderabad Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया है, जो उन लोगों के लिए सबक है जो टैक्स से बचने के लिए आखिरी वक्त पर 'स्ट्रीटजिक प्लानिंग' का सहारा लेते हैं। इस मामले में एक महिला टैक्सपेयर ने अपनी इनकम को पति की इनकम के साथ 'क्लब' करने की कोशिश की, ताकि वह टैक्स की जिम्मेदारी से बच सके।
क्या था पूरा मामला?
टैक्सपेयर ने तय समय सीमा के भीतर अपनी रिटर्न फाइल नहीं की थी। जब विभाग ने भारी मात्रा में अनडिस्क्लोज्ड फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FD) पकड़े, तो उसने एक साल से ज्यादा समय तक कोई जवाब नहीं दिया। जब पति के असेसमेंट को फिर से खोलने (reassess) की कानूनी समय सीमा समाप्त हो गई, तब उसने दावा किया कि यह पैसा पति द्वारा गिफ्ट की गई संपत्ति से आया है।
ट्रिब्यूनल की कड़ी टिप्पणी
ITAT ने इस देरी को 'बैड फेथ' (बुरी नीयत) माना है। कोर्ट ने कहा कि जब डिपार्टमेंट के पास पति को दोबारा जांचने का अधिकार ही नहीं बचा, तब यह दावा करना कि पैसा पति का था, सिर्फ टैक्स से बचने का एक तरीका है। नतीजा यह रहा कि टैक्सपेयर को खुद ही इस पर भारी टैक्स चुकाना पड़ा।
सबक और जोखिम
आजकल विभाग Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) के जरिए हर ट्रांजैक्शन पर नजर रख रहा है।
- पेनल्टी का डर: अगर आप आय को छुपाते हैं या गलत जानकारी देते हैं, तो Income-tax Act की धारा 270A के तहत 50% से 200% तक भारी-भरकम पेनल्टी लग सकती है।
- टैक्स टिप: किसी भी गिफ्ट डीड (Gift Deed) का सही डॉक्यूमेंटेशन और समय पर इनकम रिटर्न फाइल करना ही भविष्य में कानूनी परेशानियों से बचने का इकलौता और सुरक्षित तरीका है।
