ITAT चेन्नई ने असेसमेंट ईयर 2015-16 के लिए जारी **₹2.51 करोड़** के टैक्स रीअसेसमेंट नोटिस को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि यह नोटिस कानूनी समय सीमा खत्म होने के पांच दिन बाद भेजा गया था, जो इसे अवैध बनाता है।
चेन्नई की Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) बेंच ने करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए ₹2.51 करोड़ की टैक्स डिमांड वाले नोटिस को रद कर दिया है। यह मामला टैक्स कानून में तय समय सीमा (statutory timelines) के पालन पर जोर देता है, क्योंकि ट्रिब्यूनल ने पाया कि नोटिस कानूनी रूप से मान्य अवधि के बाद जारी किया गया था।
विवाद की जड़
यह पूरा मामला असेसमेंट ईयर 2015-16 के दौरान एक अनएक्सप्लेंड ₹2 करोड़ के बैंक डिपॉजिट और उससे जुड़ी ब्याज आय से जुड़ा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 5 अप्रैल, 2022 को सेक्शन 148 के तहत नोटिस जारी किया था। विभाग का तर्क था कि हालिया कानूनी बदलावों के तहत हाई-वैल्यू एसेट्स वाले मामलों में केस रीओपन करने की समय सीमा बढ़ गई है।
ट्रिब्यूनल का कड़ा रुख
ट्रिब्यूनल ने पाया कि नोटिस मिलने में 5 दिन की देरी हुई। पुराने नियमों के अनुसार, उस असेसमेंट ईयर के लिए समय सीमा 31 मार्च, 2022 को खत्म हो चुकी थी। विभाग ने 1 अप्रैल, 2021 से लागू हुए नए 10 साल वाले नियम का सहारा लेने की कोशिश की, लेकिन ITAT ने इसे खारिज कर दिया।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि नया 10 साल का नियम उन मामलों पर लागू नहीं हो सकता जो पुराने नियमों के तहत पहले ही समय सीमा पार कर चुके थे। आयकर अधिनियम की धारा 149(1) के पहले प्रावधान का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि विभाग पुराने बंद हो चुके मामलों को दोबारा नहीं खोल सकता।
यह फैसला साफ करता है कि कर अधिकारियों को भी प्रशासनिक कानूनों और तय समय सीमा का सख्ती से पालन करना होगा। टैक्स विभाग भले ही आगे अपील करे, लेकिन ट्रिब्यूनल का यह रुख करदाताओं के लिए एक मजबूत कानूनी मिसाल है।
