ITAT Pune ने NRI निवेशकों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब म्यूचुअल फंड गेन्स पर India-Singapore DTAA के तहत टैक्स रिफंड का दावा किया जा सकेगा, भले ही टैक्स रिटर्न रिवाइज करने की समय सीमा खत्म हो गई हो।
Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) पुणे ने उन NRI टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है, जिन्होंने रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन मिस कर दी थी। मामला ₹1.70 लाख के टैक्स रिफंड से जुड़ा है, जो 2024-25 असेसमेंट ईयर के दौरान म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट पर मिले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर मांगा गया था।
क्या था पूरा मामला?
टैक्सपेयर ने शुरुआत में इन गेन्स को भारत में टैक्सेबल बताया था। लेकिन बाद में, जब रिटर्न रिवाइज करने की विंडो बंद हो गई, तो उन्होंने India-Singapore Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) के तहत छूट मांगी। टैक्स विभाग ने इस दलील को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था कि डेडलाइन बीतने के बाद इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कानूनी नजीर और कोर्ट का रुख
पुणे ट्रिब्यूनल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 'CIT versus Pruthvi Brokers & Shareholders' मामले का हवाला देते हुए इस फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने साफ किया कि अपीलीय अधिकारियों के पास यह कानूनी शक्ति है कि वे नए दावों पर विचार कर सकें, भले ही वे मूल टैक्स रिटर्न का हिस्सा न रहे हों।
वेरिफिकेशन अभी बाकी
हालांकि यह फैसला राहत भरा है, लेकिन रिफंड ऑटोमैटिक नहीं होगा। ITAT ने इस मामले को फिर से असेसिंग ऑफिसर के पास भेज दिया है ताकि टैक्सपेयर की रेजिडेंसी स्टेटस और म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शंस की बारीकी से जांच हो सके।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपना टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) और ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट्स तैयार रखें, क्योंकि बिना प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन के इस राहत का लाभ उठाना मुश्किल होगा।
