ITAT का बड़ा फैसला: पुश्तैनी ज्वेलरी पर टैक्स से राहत, लेकिन ब्रोकरेज खर्चे पर फंसी पेंच

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ITAT का बड़ा फैसला: पुश्तैनी ज्वेलरी पर टैक्स से राहत, लेकिन ब्रोकरेज खर्चे पर फंसी पेंच

Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने अंजनी अशोक पारिख के केस में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने **₹67.39 लाख** की पुश्तैनी ज्वेलरी पर टैक्स की मांग को खारिज कर दिया, लेकिन HUF को दिए गए **₹12 लाख** के ब्रोकरेज भुगतान को अमान्य ठहराया है।

पुश्तैनी ज्वेलरी पर मिली राहत

इनकम टैक्स विभाग का मानना था कि ₹67.39 लाख की ज्वेलरी बेहिसाबी पैसा है, क्योंकि करदाता ने 1997-98 के बाद से वेल्थ-टैक्स रिटर्न फाइल करना बंद कर दिया था। विभाग ने यह अनुमान लगाया कि एसेट्स बेच दिए गए होंगे। हालांकि, ITAT ने इस तर्क को नकार दिया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि वेल्थ-टैक्स रिटर्न न भरने का मतलब एसेट्स की बिक्री नहीं है, यह बस यह दर्शाता है कि नेट वर्थ टैक्सेबल लिमिट से नीचे आ गई थी। करदाता ने पुराने वेल्थ-टैक्स रिकॉर्ड्स, वैल्यूएशन रिपोर्ट और 2015 के फैमिली डिक्लेरेशन के जरिए साबित किया कि ज्वेलरी उनके पास ही थी, जिसके बाद ट्रिब्यूनल ने टैक्स एडिशन को हटा दिया।

ब्रोकरेज भुगतान की बारीकी से जांच

वहीं, ब्रोकरेज खर्चों के मामले में करदाता को झटका लगा है। करदाता ने प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन के लिए कुल ₹30 लाख की ब्रोकरेज फीस दिखाई थी, जिसमें एक व्यक्ति को ₹12 लाख और उसी के HUF (Hindu Undivided Family) को अतिरिक्त ₹12 लाख दिए गए थे। ITAT ने पाया कि HUF ने कोई अलग सेवा नहीं दी थी। कोर्ट ने माना कि केवल इनकम डिक्लेयर करने से कोई भुगतान 'जेनुइन बिजनेस एक्सपेंस' नहीं बन जाता। नतीजतन, ₹12 लाख के इस खर्च को डिसअलाउ कर दिया गया।

निवेशकों के लिए सबक

यह केस दो बड़ी बातें सिखाता है: पहला, पुश्तैनी एसेट्स के लिए पुख्ता डॉक्यूमेंटेशन और हिस्ट्री बनाए रखना जरूरी है। दूसरा, फैमिली एंटिटीज (जैसे HUF) को किए गए भुगतान पर टैक्स अधिकारी कड़ी नजर रखते हैं। यदि आप ऐसे खर्चों पर डिडक्शन क्लेम करते हैं, तो आपको उन सेवाओं का प्रमाण देना होगा जो वास्तव में दी गई हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.