ITAT Mumbai ने एक प्रॉपर्टी खरीद मामले में **₹55.2 लाख** की 'अज्ञात आय' (unexplained wealth) के एडिशन को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि परिवार के सदस्यों का योगदान और बैंक लोन इसके ठोस सबूत हैं।
मामला क्या था?
यह विवाद 2015-16 के फाइनेंशियल ईयर में खरीदी गई एक आवासीय संपत्ति से जुड़ा है। इनकम टैक्स विभाग ने सेक्शन 69 के तहत कार्यवाही करते हुए इसे 'अनएक्सप्लेंड इन्वेस्टमेंट' माना था, क्योंकि टैक्सपेयर ने उस साल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं किया था। विभाग ने प्रॉपर्टी की कुल लागत ₹87.2 लाख मानकर ₹55.2 लाख को अवैध आय घोषित कर दिया था।
ट्रिब्यूनल का फैसला
ITAT के सामने टैक्सपेयर ने साबित किया कि यह एक जॉइंट परचेज थी। सबूत के तौर पर बैंक ट्रांसफर, रोजगार के दस्तावेज और पेंशन स्टेटमेंट पेश किए गए। इससे यह साफ हुआ कि ₹32 लाख का होम लोन और परिवार के सदस्यों के योगदान से यह संपत्ति खरीदी गई थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि विभाग ने सबूतों के बजाय सिर्फ अनुमानों के आधार पर यह फैसला लिया था।
निवेशकों के लिए सबक
यह केस उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो ITR फाइल नहीं करते। आज के समय में ऑटोमेटेड टैक्स स्क्रूटनी सिस्टम हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन (जैसे प्रॉपर्टी खरीदना) को तुरंत ट्रैक कर लेते हैं। यदि आपने ITR नहीं भरा है, तो विभाग द्वारा आपके निवेश को 'बेनामी' या 'अज्ञात आय' मानने का जोखिम बढ़ जाता है।
काम की सलाह:
- हमेशा हर हाई-वैल्यू एसेट के लिए अलग-अलग ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड रखें।
- जॉइंट प्रॉपर्टी खरीदते समय बैंक लोन और कॉन्ट्रिब्यूशन के दस्तावेज शुरुआत से ही दुरुस्त रखें।
- भले ही आपकी इनकम टैक्स के दायरे में न हो, ITR फाइल करना कानूनी उलझनों से बचने का सबसे सुरक्षित रास्ता है।
