ITAT मुंबई ने एक महत्वपूर्ण फैसले में **₹17.18 लाख** की टैक्स पेनल्टी को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि टैक्स अधिकारियों ने नोटिस जारी करते समय गलत कानूनी धारा का इस्तेमाल किया था, जो प्रक्रियात्मक रूप से अमान्य है।
प्रक्रिया में चूक पर लगी फटकार
मुंबई स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने हाल ही में ₹17.18 लाख की पेनल्टी को रद्द करते हुए साफ किया है कि टैक्स अधिकारियों को दंड लगाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है। यह मामला फाइनेंशियल ईयर 2016-17 के दौरान ₹55.62 लाख की अनएक्सप्लेंड कैश डिपॉजिट से जुड़ा था।
कानूनी दांव-पेच का मामला
विवाद की मुख्य जड़ गलत सेक्शन का उपयोग था। असेसमेंट के दौरान टैक्स अधिकारी ने उल्लेख किया था कि पेनल्टी की कार्यवाही Section 271AAC और 272A(1)(d) के तहत शुरू की जाएगी। हालांकि, जब फाइनल नोटिस जारी किया गया, तो उसमें Section 271(1)(c) का हवाला दिया गया, जो गलत जानकारी या आय छिपाने से संबंधित है।
ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने इस बदलाव को कानूनी रूप से गलत माना। नियम यह है कि किसी विशेष धारा के तहत कार्यवाही शुरू करने का स्पष्ट निर्देश ऑरिजनल असेसमेंट ऑर्डर में होना चाहिए। चूंकि ऐसा कोई औपचारिक निर्देश नहीं था, इसलिए पेनल्टी का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) ही त्रुटिपूर्ण हो गया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि अधिकारी बाद में अलग नोटिस जारी करके इस प्रक्रियात्मक गलती को सुधार नहीं सकते।
यह फैसला टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत है और यह याद दिलाता है कि भले ही टैक्स का मामला लंबित हो, लेकिन पेनल्टी लगाने का तरीका कानूनी रूप से सटीक होना चाहिए। भविष्य के लिए यह एक मिसाल है कि असेसमेंट ऑर्डर में प्रक्रियात्मक स्पष्टता कितनी जरूरी है।
