Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) ने जयपुर में एक इंश्योरेंस एजेंट को बड़ी राहत दी है। **₹35 लाख** से अधिक के कैश डिपॉजिट को ट्रिब्यूनल ने 'अनएक्सप्लेंड इनकम' मानने से इनकार कर दिया और इसे वैध बिजनेस ट्रांजैक्शन माना।
विवाद की जड़ और टैक्स विभाग का रुख
यह मामला राजस्थान के एक इंश्योरेंस एजेंट से जुड़ा है, जिसके बैंक अकाउंट में जमा ₹35.08 लाख के कैश को इनकम टैक्स विभाग ने 'अघोषित आय' (undisclosed income) करार दिया था। विभाग का तर्क था कि चूंकि इन पैसों से जुड़ी कई इंश्योरेंस पॉलिसी में एजेंट का नाम नहीं था, इसलिए इसे वैध बिजनेस आय नहीं माना जा सकता। विभाग की इस कार्रवाई से एजेंट पर भारी टैक्स और पेनल्टी का खतरा मंडरा रहा था।
एजेंट ने कैसे जीता केस?
एजेंट ने ट्रिब्यूनल के सामने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि इंश्योरेंस एक्ट के तहत एक एजेंट एक समय में केवल एक ही कंपनी का प्रतिनिधित्व कर सकता है। क्लाइंट्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने अन्य एजेंटों के साथ 'कमीशन-शेयरिंग' का अरेंजमेंट किया था, जिस कारण कागजात में विसंगतियां आईं।
अपनी बात साबित करने के लिए एजेंट ने पॉलिसी रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड्स और अन्य पार्टनर एजेंटों के शपथ पत्र (affidavits) पेश किए। ITAT ने माना कि यह पैसा वैध बिजनेस चैनलों के जरिए आया था और विभाग के आरोपों को खारिज कर दिया।
टैक्सपेयर्स के लिए सबक
यह मामला उन सभी प्रोफेशनल्स के लिए एक चेतावनी है जो कैश में लेनदेन करते हैं। टैक्स ऑडिट के बदलते दौर में, ₹2 लाख से अधिक के कैश लेनदेन पर नियमों की सख्ती बढ़ गई है। किसी भी तरह की कानूनी स्क्रूटनी से बचने के लिए पुख्ता पेपर ट्रेल, बिजनेस पार्टनरशिप के लिखित एग्रीमेंट और बैंक रिकॉर्ड्स का मेंटेनेंस करना ही एकमात्र सुरक्षित तरीका है।
