ITAT Jaipur का बड़ा फैसला: रिटायर कर्मचारियों को लीव एनकैशमेंट पर मिली टैक्स राहत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ITAT Jaipur का बड़ा फैसला: रिटायर कर्मचारियों को लीव एनकैशमेंट पर मिली टैक्स राहत

ITAT जयपुर ने LIC की एक रिटायर्ड कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए **₹9.04 लाख** के लीव एनकैशमेंट पर पूरी तरह टैक्स छूट दे दी है। ट्रिब्यूनल ने सलाहकार की गलती के कारण हुई **1,277 दिन** की देरी को माफ कर दिया और नई **₹25 लाख** की टैक्स छूट सीमा को पुराने मामलों पर भी लागू किया है।

टैक्स विवाद का निपटारा

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कर्मचारी जून 2020 में रिटायर हुईं। उस समय प्राइवेट सेक्टर (नॉन-गवर्नमेंट) कर्मचारियों के लिए लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट की सीमा केवल ₹3 लाख थी। विभाग ने बाकी के ₹6.04 लाख पर टैक्स की मांग की थी। हालांकि, ITAT जयपुर ने मई 2023 में जारी CBDT की अधिसूचना संख्या 31/2023 का हवाला दिया, जिसमें इस सीमा को बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया गया था। ट्रिब्यूनल ने इस बढ़ी हुई सीमा को रिट्रोस्पेक्टिव (पुराने प्रभाव से) लागू करने का आदेश दिया, जिससे कर्मचारी को बड़ी राहत मिली।

देरी को किया माफ

केस में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब पता चला कि अपील दायर करने में 1,277 दिन की देरी हुई थी। यह देरी कर्मचारी के पुराने टैक्स कंसल्टेंट की लापरवाही के कारण हुई थी, जिसने अपील खारिज होने की जानकारी नहीं दी थी। इनकम टैक्स विभाग ने देरी के आधार पर अपील का विरोध किया, लेकिन ITAT जयपुर ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को उसके सलाहकार की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए।

टैक्सपेयर्स के लिए सबक

यह फैसला उन लोगों के लिए बहुत अहम है जो पुराने टैक्स विवादों से जूझ रहे हैं। यह स्पष्ट करता है कि ट्रिब्यूनल अब टैक्सपेयर-फ्रेंडली नियमों को पुराने मामलों में भी लागू करने के लिए तैयार है। हालांकि, यह केस एक चेतावनी भी है कि पूरी तरह से कंसल्टेंट पर निर्भर न रहें और समय-समय पर अपने टैक्स स्टेटस को खुद भी ट्रैक करते रहें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.