Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) जयपुर ने एक भारतीय करदाता को बड़ी राहत दी है। अमेरिका शिफ्ट होने के दौरान टैक्स रिटर्न न भर पाने पर लगे **₹8.29 लाख** के जुर्माने को ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया है, जो Section 270A के तहत एक बड़ा कानूनी स्पष्टीकरण है।
राहत की खबर: क्या गलती और क्या बेईमानी?
ITAT जयपुर ने स्पष्ट किया है कि केवल टैक्स रिटर्न न भर पाना 'टैक्स चोरी' के बराबर नहीं है। यह मामला अभिशुभम बहादुर सक्सेना से जुड़ा है, जो 2018 में अमेरिका शिफ्ट हुए थे। उस दौरान रिटर्न फाइल न होने पर इनकम टैक्स विभाग ने इसे आय की 'गलत रिपोर्टिंग' (Misreporting) मानकर ₹8.29 लाख का भारी जुर्माना ठोक दिया था।
ट्रिब्यूनल ने क्यों पलटा फैसला?
ITAT की बेंच ने पाया कि टैक्सपेयर ने विभाग की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही ₹1.62 लाख का सेल्फ-असेसमेंट टैक्स, ब्याज और लेट फीस के साथ जमा कर दिया था। बेंच ने कहा कि:
- करदाता की मंशा टैक्स चोरी की नहीं थी।
- Section 270A(6)(a) के तहत यदि गलती 'बोनफाइड' (सच्ची) है, तो जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिफ्टिंग के कारण हुई प्रशासनिक चूक को जानबूझकर की गई गलती नहीं माना जा सकता।
निवेशकों और NRI के लिए सबक
यह फैसला उन लोगों के लिए बेहद अहम है जो सीमाओं के पार अपना फाइनेंशियल मैनेजमेंट संभालते हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैक्स फाइलिंग एक अनिवार्य दायित्व है और इस मामले में 'स्वैच्छिक भुगतान' (Voluntary Payment) ने करदाता को बचाने में अहम भूमिका निभाई। भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद से बचने के लिए समय पर कंप्लायंस करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
