Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) Bangalore ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया है कि NRE अकाउंट में आने वाली विदेशी सैलरी पर अपने आप टैक्स नहीं लगता।
फैसले का आधार
यह मामला Santhoshkumar Vithal Akka बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर का है। दक्षिण कोरिया में काम करने वाले एक NRI की विदेशी सैलरी को टैक्स विभाग ने भारत में उनकी घरेलू आय मान लिया था। विभाग का तर्क था कि टैक्सपेयर के पास 'टैक्स रेसिडेंसी सर्टिफिकेट' (TRC) नहीं है, इसलिए इसे भारत में टैक्स किया जाना चाहिए।
ITAT ने क्या कहा?
ITAT ने साफ कर दिया कि टैक्स असेसमेंट का आधार कागजी औपचारिकताओं के बजाय हकीकत होनी चाहिए। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पासपोर्ट एंट्री-एग्जिट स्टैम्प, बैंक स्टेटमेंट और एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट एनआरआई स्टेटस साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। सिर्फ इसलिए कि पैसा NRE अकाउंट में आया है, उसे भारत की कमाई नहीं माना जा सकता।
आगे क्या करना है?
भले ही यह फैसला NRI के हक में है, लेकिन ट्रिब्यूनल ने मामले को दोबारा असेसमेंट ऑफिसर के पास भेजा है ताकि सही मानकों के आधार पर समीक्षा हो सके। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी को टैक्स से सीधी छूट मिल गई है।
निवेशकों के लिए सीख
यह फैसला साबित करता है कि डॉक्यूमेंटेशन बेहद जरूरी है। भले ही ट्रिब्यूनल का रुख व्यावहारिक है, लेकिन सबूत पेश करने की जिम्मेदारी अभी भी टैक्सपेयर की है। अपनी सैलरी स्लिप्स, पासपोर्ट और विदेशी कॉन्ट्रैक्ट को हमेशा सुरक्षित रखें, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के टैक्स विवाद से बचा जा सके।
