ITAT जयपुर ने एक रिटायर्ड SBI कर्मचारी के हक में फैसला सुनाते हुए लीव एनकैशमेंट पर ₹25 लाख तक की टैक्स छूट को रेट्रोस्पेक्टिव (Retrospective) तरीके से लागू करने की मंजूरी दी है। इस आदेश के बाद कर्मचारी पर लगे ₹6.29 लाख के टैक्स डिमांड को हटा दिया गया है।
इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) की जयपुर बेंच ने भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के एक रिटायर्ड कर्मचारी को बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने साल 2023 में लागू हुई ₹25 लाख की टैक्स-फ्री लीव एनकैशमेंट लिमिट को रेट्रोस्पेक्टिव तौर पर उन कर्मचारियों पर भी लागू करने की अनुमति दी है, जो इस नियम के आने से पहले ही रिटायर हो चुके थे।
क्या था पूरा मामला?
विवाद तब शुरू हुआ जब टैक्स अधिकारियों ने रिटायर्ड कर्मचारी को पुरानी सीमा के तहत केवल ₹3 लाख तक की ही छूट दी। कर्मचारी को लीव एनकैशमेंट के रूप में ₹9.29 लाख मिले थे, जिस पर विभाग ने ₹6.29 लाख को टैक्सेबल इनकम मान लिया था। यह मामला इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10AA) के तहत चल रहा था।
ट्रिब्यूनल की टिप्पणी
ITAT ने विभाग के कड़े रुख को खारिज करते हुए कहा कि ₹25 लाख की नई सीमा एक 'उपचारात्मक उपाय' (Remedial Measure) है, जिसे आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए लाया गया है। ट्रिब्यूनल का मानना है कि यदि इस लाभ को उन लोगों से वंचित रखा जाता है जो नियम बदलने से ठीक पहले रिटायर हुए, तो यह संशोधन के मुख्य उद्देश्य को ही विफल कर देगा।
इस फैसले के बाद उस कर्मचारी की ₹6.29 लाख की अतिरिक्त टैक्स देनदारी को खत्म कर दिया गया है।
अन्य रिटायरियों के लिए संकेत
यह फैसला उन सभी रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए एक मिसाल बन सकता है जो 2023 के नोटिफिकेशन के आसपास रिटायर हुए थे। यह कानूनी प्रेसिडेंट आने वाले समय में बैंकिंग और पब्लिक सेक्टर के उन लोगों के लिए कानूनी आधार बन सकता है जो इसी तरह के टैक्स विवादों का सामना कर रहे हैं। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या टैक्स विभाग इस मामले में आगे अपील करता है या इस फैसले को एक नजीर मानकर स्वीकार करता है।
