IRFC का बड़ा एलान: शेयरधारकों को मिलेगा ₹1.05 डिविडेंड, ₹70,000 करोड़ जुटाएगी कंपनी
IRFC के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 09 मार्च, 2026 को हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए हैं। सबसे पहले, कंपनी ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर (Face Value ₹10) पर ₹1.05 का दूसरा अंतरिम डिविडेंड (Second Interim Dividend) देने का ऐलान किया है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 13 मार्च, 2026 तय की गई है और भुगतान 30 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा।
इसके अलावा, IRFC अगले वित्तीय वर्ष, FY2026-27 के लिए ₹70,000 करोड़ तक का बाजार उधार (Market Borrowing) जुटाने की योजना पर भी आगे बढ़ेगी। इस फंड का इस्तेमाल रेलवे की जरूरतों को पूरा करने, कंपनी के डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) प्रयासों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। यह पैसा घरेलू और विदेशी, दोनों बाजारों से उठाया जा सकता है।
क्यों यह खबर अहम है?
यह अंतरिम डिविडेंड सीधे शेयरधारकों को कंपनी के मुनाफे का हिस्सा देगा, जो निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर है। वहीं, भारी-भरकम उधार जुटाने की मंजूरी यह दर्शाती है कि IRFC भारतीय रेलवे के विस्तार और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखेगा। यह कदम कंपनी को अपने भविष्य के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और ग्रोथ इनिशिएटिव्स (Growth Initiatives) के लिए फंड जुटाने में मदद करेगा।
IRFC की पृष्ठभूमि
IRFC, रेल मंत्रालय के तहत एक पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज (Public Sector Enterprise) है, जिसकी स्थापना 1986 में हुई थी। इसका मुख्य काम भारतीय रेलवे की कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरतों के लिए फंड जुटाना है। कंपनी बॉन्ड्स, टर्म लोंस और ECBs जैसे विभिन्न मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए फंड जुटाती है और फिर उसे लीज पर भारतीय रेलवे को देती है। कंपनी लिस्टिंग (2021) के बाद से लगातार डिविडेंड दे रही है। IRFC अपनी फाइनेंसिंग पोर्टफोलियो को रेलवे के अलावा मेट्रो रेल, रिन्यूएबल एनर्जी और लॉजिस्टिक्स जैसे अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में भी डाइवर्सिफाई कर रहा है।
आगे क्या?
- शेयरधारकों को FY25-26 के लिए डिविडेंड का भुगतान मिलेगा।
- FY2026-27 में ₹70,000 करोड़ जुटाने के लिए IRFC की योजनाएं आगे बढ़ेंगी।
- कंपनी बड़े पैमाने पर रेलवे परियोजनाओं और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर वेंचर्स को फाइनेंस करने की अपनी भूमिका जारी रखेगी।
- शेयरधारकों को डिविडेंड पर TDS कटौती से बचने के लिए रिकॉर्ड डेट तक अपने बैंक डिटेल्स अपडेट रखने होंगे।
ध्यान रखने योग्य जोखिम (Risks)
- रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance): IRFC को फरवरी 2026 में BSE और NSE द्वारा बोर्ड कंपोजिशन (Board Composition) के उल्लंघन के लिए ₹9.77 लाख का जुर्माना लगाया गया था। हालांकि कंपनी ने सरकारी नियुक्ति की बाधाओं का हवाला देते हुए छूट का अनुरोध किया है, यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) पर चल रही निगरानी को दर्शाता है।
- डिविडेंड पेमेंट: डिविडेंड का भुगतान केवल इलेक्ट्रॉनिक मोड (Electronic Mode) से होगा, इसलिए शेयरधारकों को बैंक डिटेल्स अपडेट करनी होंगी।
- उच्च ऋण स्तर (High Debt Levels): हालांकि यह इसके बिजनेस मॉडल का हिस्सा है, IRFC का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) काफी ऊंचा बना हुआ है, हालांकि इसमें धीरे-धीरे कमी आ रही है।
अन्य कंपनियाँ (Peers)
IRFC मुख्य रूप से भारतीय रेलवे के लिए फाइनेंसिंग का काम करती है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग के क्षेत्र में इसके कुछ प्रमुख पीयर्स (Peers) हैं:
- Power Finance Corporation (PFC): पावर सेक्टर फाइनेंसिंग पर केंद्रित एक बड़ी NBFC, जिसका लोन बुक ₹11 लाख करोड़ से ज्यादा है।
- REC Ltd.: पावर सेक्टर के लिए एक और बड़ी PSU फाइनेंसियर, जिसका FY25 का नेट प्रॉफिट लगभग ₹15,713 करोड़ था।
- IFCI Ltd.: इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए डेट और इक्विटी समाधान (Debt and Equity Solutions) प्रदान करती है।
अहम आंकड़े
- मार्च 2025 तक IRFC का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 7.83 था, जो पिछले समय से कम है।
- कंपनी FY2022-23 के लिए स्वीकृत ₹66,500 करोड़ जैसे पिछले उधार कार्यक्रमों के आधार पर FY2026-27 में ₹70,000 करोड़ तक जुटाने का लक्ष्य रखती है।
आगे क्या देखना होगा?
- डिविडेंड भुगतान की वास्तविक तारीख और शेयरधारक खातों में क्रेडिट की पुष्टि।
- FY2026-27 में ₹70,000 करोड़ के उधार कार्यक्रम को लागू करने के लिए IRFC की रणनीति और समय-सीमा।
- गैर-रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में डाइवर्सिफिकेशन पहलों पर प्रगति।
- BSE और NSE से मिले जुर्माने पर छूट के अनुरोधों पर अपडेट।
- भारतीय रेलवे की कैपिटल एक्सपेंडिचर योजनाओं और IRFC की भूमिका पर कोई और घोषणा।