Indian Railway Finance Corporation (IRFC) ने आने वाले फाइनेंशियल ईयर (FY27) के लिए ₹1 लाख करोड़ के लोन सैंक्शन करने का एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह FY26 के ₹72,949 करोड़ के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए कंपनी ₹40,000 करोड़ का डिस्बर्समेंट भी करना चाहती है, जो कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ती मांग को दिखाता है।
डाइवर्सिफिकेशन का दम
इस बड़ी योजना के पीछे IRFC की अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी में बदलाव साफ दिख रहा है। अब कंपनी सिर्फ भारतीय रेलवे पर ही निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि मेट्रो रेल, पोर्ट्स, पावर जनरेशन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स में भी फाइनेंसिंग का विस्तार करेगी। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार दुबे ने बताया कि अच्छी क्वालिटी वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का एक मजबूत पाइपलाइन तैयार है। FY26 तक IRFC के कुल एसेट्स ₹5 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर चुके थे।
फाइनेंसियल परफॉरमेंस और फंड जुटाना
IRFC ने FY26 को अपने अब तक के हाईएस्ट प्रॉफिट ₹7,009 करोड़ के साथ समाप्त किया, जो पिछले साल के ₹6,502 करोड़ से 7.8% की बढ़ोतरी दर्शाता है। साथ ही, कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी बढ़कर ₹4.85 लाख करोड़ पर पहुंच गई। एक बड़ी राहत की बात यह है कि कंपनी ने अपना जीरो नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) स्टेटस बरकरार रखा है। इस विस्तार को पंख देने के लिए IRFC FY27 में ₹70,000 करोड़ फंड जुटाने की भी तैयारी कर रही है, जिसमें विदेशी बाजारों से भी पैसा शामिल होगा।
वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय
हालांकि, इस विस्तार के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। मई 2026 तक IRFC का P/E रेशियो लगभग 18.4-18.7 था, जो कि इसके मुकाबले Power Finance Corporation (PFC) और REC Ltd जैसे 6x के P/E पर ट्रेड कर रहे हैं। PFC और REC की रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी IRFC के 12.37% के मुकाबले 19% से अधिक है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या बाजार IRFC की डाइवर्सिफिकेशन ग्रोथ को पूरी तरह वैल्यू कर रहा है, या फिर कंपनी की एफिशिएंसी में कमी है। एनालिस्ट्स इस स्टॉक पर काफी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। वे 'स्ट्रांग सेल' की सलाह दे रहे हैं और उनका टारगेट प्राइस ₹60-₹61.20 है, जो इसके मौजूदा भाव ₹98-₹100 से काफी नीचे है। यह बड़ा अंतर कंपनी की ग्रोथ की उम्मीदों और बाजार की धारणा के बीच की खाई को दर्शाता है। IRFC का डेट-टू-इक्विटी रेशियो लगभग 7.69 है, जो भविष्य में फंड मैनेजमेंट के लिए एक अहम फैक्टर साबित हो सकता है।
आउटलुक
IRFC को उम्मीद है कि FY27 में इसका नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) सुधरकर 1.65% तक पहुंचेगा, जो FY26 में 1.5% था। सरकारी समर्थन IRFC के इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ में रोल को बनाए रखेगा, लेकिन कंपनी की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कंपटीशन, लेवरेज और डाइवर्सिफिकेशन को कितनी कुशलता से संभाल पाती है। FY27 में ₹70,000 करोड़ की फंड जुटाने की योजना बाजार की ओर से इसकी डेट की मांग का एक अहम पैमाना होगी।