IRFC Stock: रिकॉर्ड कमाई के बावजूद शेयर में गिरावट, ₹86 के स्तर पर 52-हफ्ते का लो!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IRFC Stock: रिकॉर्ड कमाई के बावजूद शेयर में गिरावट, ₹86 के स्तर पर 52-हफ्ते का लो!

Indian Railway Finance Corporation (IRFC) के शेयर में आज भारी गिरावट आई है। कंपनी ने जून 2026 तिमाही में अब तक का सबसे ज़्यादा प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन इसके बावजूद शेयर ₹86.02 के 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों के बीच कंपनी के घटते लोन बुक, कम होते प्रॉफिट मार्जिन और सरकारी हिस्सेदारी बिक्री के दबाव को लेकर चिंता बनी हुई है।

IRFC के नतीजों और शेयर की चाल में क्यों है इतना अंतर?

सरकारी कंपनी Indian Railway Finance Corporation (IRFC) के नतीजे भले ही शानदार हों, लेकिन शेयर बाजार में इसका उल्टा असर दिख रहा है। जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में कंपनी ने ₹1,927.21 करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो कि अब तक का सबसे ज़्यादा है। इसी के साथ, कंपनी की कुल इनकम भी ₹8,391.34 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। लेकिन, इसके बावजूद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर दबाव बना रहा और 7 अगस्त 2026 को यह ₹86.02 के 52-हफ्ते के निचले स्तर पर चला गया।

निवेशक इन बातों से चिंतित

यह शेयर की चाल दर्शाती है कि निवेशक सिर्फ रिकॉर्ड कमाई पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि बिजनेस की कुछ बड़ी चुनौतियों पर भी गौर कर रहे हैं। शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी चिंता कंपनी की मैनेजमेंट के तहत संपत्ति (Assets Under Management - AUM) में आई कमी है। मार्च 2026 तक जहां यह ₹4.85 ट्रिलियन थी, वहीं जून तिमाही के अंत तक घटकर ₹4.79 ट्रिलियन रह गई। एक ऐसी कंपनी के लिए जिसका रेवेन्यू सीधे उसके लोन बुक पर निर्भर करता है, पोर्टफोलियो का सिकुड़ना भविष्य की कमाई को सीमित कर सकता है।

मार्जिन पर भी पड़ रहा दबाव

मुनाफे पर भी दबाव देखा जा रहा है। कंपनी का एनुअलाइज्ड नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM), जो बताता है कि कंपनी लोन देने से कितना कमा रही है, जून तिमाही में घटकर 1.48% रह गया। पिछले साल की इसी अवधि में यह 1.53% था। पतले मार्जिन वाले बिजनेस मॉडल में, थोड़ी सी भी कमी बॉटम-लाइन ग्रोथ पर बड़ा असर डाल सकती है। निवेशक इन नंबरों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि मार्जिन को बनाए रखना या बढ़ाना कंपनी की लंबी अवधि की स्थिरता के लिए बहुत ज़रूरी है।

सरकारी बिकवाली का लगातार डर

बाजार में लगातार शेयरों की सप्लाई भी एक बड़ी वजह है। सरकार, जिसके पास कंपनी की करीब 85% हिस्सेदारी है, ने जून 2026 में पब्लिक फ्लोट बढ़ाने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) निकाला था। बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकार को मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) की ज़रूरतें पूरी करने के लिए आगे भी बिकवाली करनी पड़ सकती है। शेयरों की लगातार सप्लाई स्टॉक के ऊपरी जाने की क्षमता को सीमित करती है, क्योंकि बड़ी मात्रा में बिकवाली का दबाव अक्सर खरीदारी की रुचि पर हावी हो जाता है।

वैल्युएशन पर भी सवाल

हालिया गिरावट के बावजूद, IRFC का वैल्युएशन अन्य सरकारी बैंकों जैसे Power Finance Corporation और REC की तुलना में अभी भी ज़्यादा लग रहा है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा P/E और P/B रेश्यो इन साथियों की तुलना में प्रीमियम हैं, खासकर तब जब लोन बुक की धीमी ग्रोथ और कम डिविडेंड यील्ड को भी ध्यान में रखा जाए।

मैनेजमेंट का प्लान

कंपनी का मैनेजमेंट इस फाइनेंशियल ईयर को कंसॉलिडेशन का दौर बता रहा है। IRFC अब लोन बुक ग्रोथ को बढ़ावा देने और मार्जिन सुधारने के लिए रेलवे से जुड़े दूसरे सेक्टर्स में भी लोन देने की योजना बना रही है। इन कोशिशों की सफलता और लोन बुक को स्थिर करने की कंपनी की क्षमता, आने वाली तिमाहियों में निवेशकों के लिए मुख्य देखने लायक बातें होंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.