IREDA अब इंटरनेशनल मार्केट से सस्ता कर्ज जुटाने की तैयारी में है। इसका मकसद घरेलू मार्केट में **12%** तक पहुंच चुकी ब्याज दरों को कम करना है ताकि **500 गीगावाट** के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सके।
भारत सरकार की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी IREDA अब ग्लोबल फाइनेंशियल संस्थानों से बातचीत कर रही है ताकि लंबे समय के लिए सस्ता पैसा जुटाया जा सके। वर्तमान में देश में रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर्स को 11% से 12% की ऊंची दरों पर कर्ज मिल रहा है, जबकि विकसित देशों में यह लागत महज 2% से 3% के बीच होती है।
ब्याज दर का अंतर पाटने की कोशिश
सरकार के साल 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए करीब $220 बिलियन के भारी निवेश की जरूरत है। अगर IREDA को इंटरनेशनल फंडिंग मिलती है, तो इससे न केवल प्रोजेक्ट्स की लागत कम होगी, बल्कि कंपनी के लोन बुक की सस्टेनेबिलिटी भी बढ़ेगी।
फाइनेंशियल हेल्थ और एसेट क्वालिटी
कंपनी के प्रदर्शन की बात करें तो, फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹2,346.88 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹552.14 करोड़ रहा है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी का आउटस्टैंडिंग लोन बुक करीब ₹974.11 बिलियन था। सबसे अच्छी बात यह है कि कंपनी ने एसेट क्वालिटी में सुधार किया है, और नेट NPA घटकर 1.23% पर आ गया है, जो एक साल पहले 2.06% था। 4 नवंबर 2026 तक कंपनी का शेयर करीब ₹104.09 पर ट्रेड कर रहा था।
ऑपरेशनल रिस्क पर नजर रखें
सस्ता फंड मिलना सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को सेक्टर के कुछ रिस्क भी ध्यान में रखने चाहिए। ट्रांसमिशन बॉटलनेक्स (ग्रिड संबंधी रुकावटें) और जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण प्रोजेक्ट्स अटक सकते हैं। ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से कई बार बिजली उत्पादन में कटौती करनी पड़ती है, जिसका असर डेवलपर्स की कमाई और लोन चुकाने की क्षमता पर पड़ता है। IREDA के लिए भविष्य की ग्रोथ इन प्रोजेक्ट्स के सफल निष्पादन पर निर्भर करती है।
