सरकारी कंपनी IREDA ने Gensol Engineering और उसकी सब्सिडियरी को दिए गए **₹672.74 करोड़** के लोन को फ्रॉड यानी धोखाधड़ी की श्रेणी में डाल दिया है। कंपनी ने फंड डायवर्जन और जाली दस्तावेज़ों के आरोपों के बाद इन खातों को RBI को रिपोर्ट किया है।
क्या है पूरा मामला?
सरकारी कंपनी इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) ने Gensol Engineering Limited और उसकी सब्सिडियरी Gensol EV Lease Limited के लोन खातों को आधिकारिक तौर पर धोखाधड़ी (Fraudulent) करार दिया है। इस डेवलपमेंट की जानकारी 10 जुलाई 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को दी गई है। यह कदम फंड के दुरुपयोग और झूठे दस्तावेज़ जमा करने जैसे गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है।
कितना है फंसा हुआ पैसा?
इन डिफॉल्टिंग खातों से कुल बकाया ₹672.74 करोड़ है। इसमें Gensol Engineering का ₹453.77 करोड़ और Gensol EV Lease का ₹218.97 करोड़ बकाया है। IREDA ने अपनी वित्तीय सेहत को बचाने के लिए, मार्च 2026 तक इस टोटल एक्सपोजर का करीब 85% प्रोविजन कर लिया था। इसका मतलब है कि ज़्यादातर संभावित नुकसान का हिसाब कंपनी ने पहले ही अपने पिछले फाइनेंशियल स्टेटमेंट में कर लिया था।
धोखाधड़ी की शुरुआत कहां से हुई?
लोन खातों से जुड़ी ये दिक्कतें 2022 और 2024 के फाइनेंशियल ईयर के बीच दिए गए फंड से शुरू हुईं। यह पैसा इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) लीज़िंग फर्म BluSmart को 6,400 इलेक्ट्रिक गाड़ियां लीज़ पर देने के लिए था। हालांकि, बाद की जांच में पता चला कि केवल 4,704 गाड़ियां ही खरीदी गईं, जो प्रोजेक्ट में एक बड़ी कमी को दर्शाता है। इस गड़बड़ी के साथ-साथ अन्य वित्तीय अनियमितताओं के कारण यह मामला सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की नज़र में भी आया। SEBI ने पहले ही Gensol के प्रमोटरों, अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी पर फंड डायवर्जन और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को गुमराह करने के आरोपों के चलते सिक्योरिटीज मार्केट से पाबंदी लगा दी थी।
आगे की कानूनी कार्रवाई
IREDA बकाया फंड की रिकवरी के लिए कई कानूनी रास्ते अपना रही है। इसमें दिल्ली के डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में चल रही कार्रवाई और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में इंसॉल्वेंसी (दिवालियापन) की अर्ज़ी शामिल है। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) ने भी इस ग्रुप को दिए गए लोन के एक हिस्से को फ्रॉड बताया था। IREDA का यह नया कदम इन रेगुलेटरी और कानूनी हकीकतों के साथ उसके इंटरनल रिपोर्टिंग को अलाइन करता है।
अब निवेशक और स्टेकहोल्डर इन ट्रिब्यूनल केसों की प्रगति पर नज़र रखेंगे, क्योंकि प्रोविजन न किए गए 15% एक्सपोजर की रिकवरी और इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स का समाधान मुख्य फोकस बना रहेगा। इन कानूनी लड़ाइयों का नतीजा IREDA के बॉटम लाइन पर अंतिम असर और पब्लिक फंड की रिकवरी तय करेगा।
