इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI अब एजेंटों और इंटरमीडियरीज को मिलने वाले कमीशन को सीमित करने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद मैनेजमेंट खर्चों को घटाना है, लेकिन इससे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और सर्विस क्वालिटी पर असर पड़ने की आशंका है।
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) फिलहाल इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज को मिलने वाले कमीशन के ढांचे की समीक्षा कर रही है। यह कदम कंपनियों के मैनेजमेंट खर्चों को कम करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। रेगुलेटर का लक्ष्य कमीशन को सीमित करके सेक्टर की कार्यक्षमता (Efficiency) को बेहतर बनाना है, ताकि उसका फायदा पॉलिसीधारकों को कम प्रीमियम के रूप में मिल सके।
इंटरमीडियरीज की अहम भूमिका
भारत में कई इंश्योरेंस कंपनियों के लिए एजेंट और ब्रोकर्स सेल्स के सबसे बड़े ड्राइवर हैं। ये केवल पॉलिसी ही नहीं बेचते, बल्कि ग्राहकों को क्लेम प्रोसेस और टर्म्स समझाने के लिए एक सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम करते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो यही लोग इंश्योरेंस तक पहुंच का एकमात्र जरिया हैं। जानकारों का कहना है कि ये कमीशन केवल खर्च नहीं, बल्कि दी जाने वाली एडवाइजरी और क्लेम असिस्टेंट सर्विस का मेहनताना है।
बिजनेस और फाइनेंशियल रिस्क
यदि कमीशन रेट्स को बहुत ज्यादा घटाया गया, तो छोटे और स्वतंत्र इंटरमीडियरीज का बिजनेस करना मुश्किल हो सकता है। इससे मार्केट में कंसोलिडेशन बढ़ सकता है या एजेंटों की संख्या घट सकती है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क यह है कि जो कंपनियां अपनी सेल्स के लिए बड़े नेटवर्क पर निर्भर हैं, उन्हें तगड़ा झटका लग सकता है। हालांकि, जो कंपनियां डिजिटल या डायरेक्ट चैनल पर फोकस कर रही हैं, उन पर इसका असर कम होने की उम्मीद है।
प्रीमियम और इंडस्ट्री लॉजिक
इस बात पर भी बहस छिड़ी है कि क्या कमीशन घटने से ग्राहकों को वाकई सस्ता प्रीमियम मिलेगा। प्रीमियम तो क्लेम कॉस्ट, री-इंश्योरेंस और अंडरराइटिंग रिस्क जैसे कई फैक्टर्स पर तय होता है। आलोचकों का मानना है कि केवल कमीशन कैप करने से प्रीमियम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा, लेकिन सर्विस क्वालिटी जरूर प्रभावित हो सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
इन्वेस्टर्स को यह ट्रैक करना चाहिए कि कौन सी कंपनी अपने सेल्स चैनलों में विविधता (Diversification) ला रही है। बैंक एश्योरेंस और डिजिटल सेल्स का अच्छा बैलेंस रखने वाली कंपनियां इस बदलाव को बेहतर तरीके से संभाल पाएंगी। अब बाजार की नजर IRDAI की अगली गाइडलाइंस पर है। आने वाले क्वार्टरली नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर खास नजर रखें, जहां एजेंट रिक्रूटमेंट और बिजनेस प्रीमियम की ग्रोथ के बारे में स्पष्टता मिल सकेगी।
