IRDAI का बड़ा ऐलान: इंश्योरेंस कंपनियों के खर्चों पर लगेगी लगाम, मुनाफे पर होगा असर

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AuthorMehul Desai|Published at:
IRDAI का बड़ा ऐलान: इंश्योरेंस कंपनियों के खर्चों पर लगेगी लगाम, मुनाफे पर होगा असर

IRDAI ने लाइफ और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्चों पर नए और सख्त नियम प्रस्तावित किए हैं। इन नियमों के चलते कंपनियों को FY28 से FY32 के बीच अपने डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट को बड़े स्तर पर घटाना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर उनके ग्रोथ मॉडल पर पड़ेगा।

खर्चों पर नई सीलिंग (Management Expense Caps)

रेगुलेटर IRDAI एक नए कंसल्टेशन पेपर के साथ आया है, जिसका मकसद इंश्योरेंस कंपनियों के ऑपरेशनल खर्चों को नियंत्रित करना है। इस प्रस्ताव के तहत, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्चों (EoM) की सीमा FY28 तक 25% और FY30 तक 20% तक सीमित करने का लक्ष्य है। वहीं, लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह नियम और भी सख्त हैं—FY29 तक 15% और FY32 तक 12.5% की कैप लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।

कैलकुलेशन का तरीका बदलेगा

अब तक कंपनियां ग्रॉस रिटन प्रीमियम के आधार पर खर्चों का हिसाब लगाती थीं, जिसमें री-इंश्योरेंस से होने वाली कमाई भी शामिल होती थी। नए नियमों में केवल भारत में बेचे गए डायरेक्ट प्रीमियम को आधार बनाया जाएगा। इस बदलाव से कंपनियां अब री-इंश्योरेंस की कमाई को बफर की तरह इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी, जिससे नए खर्च के नियमों को पूरा करना कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

प्राइवेट कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती

सरकारी कंपनियों जैसे Life Insurance Corporation of India (LIC) और SBI Life Insurance के खर्च अनुपात पहले से ही इन प्रस्तावित सीमाओं के करीब हैं। हालांकि, कई प्राइवेट कंपनियां अभी इन तय मानकों से काफी ऊपर काम कर रही हैं। इन कंपनियों के लिए नई गाइडलाइन्स का पालन करना कठिन होगा, क्योंकि उन्हें नए ग्राहकों को जोड़ने और ब्रांच विस्तार के खर्चों में भारी कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी बिजनेस ग्रोथ धीमी हो सकती है।

रेगुलेटरी सख्ती और भविष्य

IRDAI का ट्रैक रिकॉर्ड काफी सख्त रहा है। पूर्व में Acko General Insurance और Niva Bupa Health Insurance जैसी कंपनियों को नियमों के पालन न करने के कारण ब्रांच विस्तार पर रोक का सामना करना पड़ा था। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या रेगुलेटर छोटे और नए खिलाड़ियों को इस बदलाव के लिए अतिरिक्त समय देता है या नहीं, क्योंकि बहुत जल्दी लागू होने वाले ये नियम सेक्टर की कॉम्पिटिटिवनेस को प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.