IRDAI ने इंश्योरेंस सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। रेगुलेटर ने कमीशन और मैनेजमेंट खर्चों को सीमित करने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसका असर साल 2027 से बैंकों और ब्रोकर्स की कमाई पर पड़ सकता है।
बीमा सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। 23 सितंबर, 2026 को जारी एक कंसल्टेशन पेपर के जरिए रेगुलेटर ने कमीशन और मैनेजमेंट खर्च (EoM) की लिमिट तय करने का प्रस्ताव दिया है।
प्रस्तावित बदलाव और समयसीमा
रेगुलेटर ने एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्च की लिमिट को अगले दो सालों में घटाकर 15% और पांच सालों में 12.5% करने का प्रस्ताव है। वहीं, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह लिमिट अगले पांच साल में 30% से घटाकर 20% करने की योजना है। 'Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Act, 2025' के तहत बैंकों और NBFCs के कर्मचारियों के लिए वॉल्यूम-बेस्ड इंसेंटिव पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।
आम जनता और स्टेकहोल्डर्स 25 अक्टूबर, 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं, और इसे जनवरी-अप्रैल 2027 के बीच लागू किया जा सकता है।
डिस्ट्रिब्यूशन और रेवेन्यू पर असर
यह बदलाव खासकर बैंक-एश्योरेंस मॉडल के लिए बड़ा झटका हो सकता है। कई कंपनियां पॉलिसियों की बिक्री के लिए बैंकों को भारी इंसेंटिव देती हैं। यदि कमीशन पर ये नई सीमाएं लागू होती हैं, तो बैंकों और ब्रोकर्स की कमाई में कमी आना तय है। इससे उन्हें अपने बिजनेस मॉडल को फिर से तैयार करने की जरूरत पड़ेगी।
Bima Sugam का डिजिटल दांव
कमीशन सुधारों के साथ-साथ IRDAI, 'Bima Sugam' प्लेटफॉर्म को भी बढ़ावा दे रहा है, जो नवंबर 2026 के आसपास लॉन्च हो सकता है। यह एक डिजिटल मार्केटप्लेस होगा, जिससे ग्राहक सीधे इंश्योरेंस खरीद सकेंगे। इसके आने से बिचौलियों पर निर्भरता और भी कम हो जाएगी।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
जो कंपनियां मुख्य रूप से बैंक-लेड डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर टिकी हैं, उन पर दबाव ज्यादा हो सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में कंपनियों के एक्सपेंस रेश्यो और उनकी नई डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रैटेजी पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
