IRDAI ने बीमा एजेंटों और बैंकों के लिए कमिशन की नई सीमाएं प्रस्तावित की हैं। इसका मकसद पॉलिसी की लागत घटाना और मिससेलिंग (misselling) पर लगाम लगाना है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कमिशन का भुगतान **₹60,800 करोड़** के स्तर पर पहुंच गया था, जिससे रेगुलेटर ने इस कड़े कदम का फैसला लिया है।
बीमा नियामक IRDAI ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाले कमिशन के ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। रेगुलेटर का साफ मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में प्रीमियम कलेक्शन की तुलना में कमिशन का भुगतान बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
डेटा में समझिए समस्या
बीते फाइनेंशियल ईयर 2025 में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने ₹60,800 करोड़ का कमिशन बांटा, जो पिछले साल के मुकाबले 18% ज्यादा था। वहीं, कुल प्रीमियम आय में सिर्फ 6.73% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस असंतुलन ने मिससेलिंग जैसी समस्याओं को जन्म दिया है।
बैंक और बीमा कंपनियों पर असर
नई प्रस्तावित नियमों का सबसे सीधा असर 'बैंकाश्योरेंस' (Bancassurance) मॉडल पर पड़ेगा। अभी कई प्रोडक्ट्स पर बैंकों को 40% से ज्यादा कमिशन मिलता है, जिसे घटाकर 5% से 20% के दायरे में लाने की योजना है। हेल्थ इंश्योरेंस में भी पहले साल का कमिशन जो अभी 30% से ऊपर है, उसे घटाकर 15% करने का प्रस्ताव है।
मिससेलिंग और प्रोत्साहन
रेगुलेटर ने बैंकों को लोन के साथ जबरन बीमा बेचने से मना किया है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स को 10% से 20% तक अतिरिक्त कमिशन का इनाम भी देने की व्यवस्था की गई है।
फिलहाल यह ड्राफ्ट 25 अक्टूबर तक फीडबैक के लिए खुला है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनियां इस बचत का फायदा ग्राहकों को कम प्रीमियम के रूप में देंगी या अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगी।
