IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर एक कड़ा कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें अपफ्रंट कमीशन और मैनेजमेंट खर्चों पर कैप लगाने का प्रस्ताव है, जिससे मिससेलिंग पर लगाम लगेगी और पूरा बिजनेस मॉडल बदल सकता है।
बीमा सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव लाने के उद्देश्य से, IRDAI ने 23 सितंबर 2026 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसका शीर्षक है 'रिकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन'। इस कदम का मुख्य लक्ष्य बीमा उत्पादों की आक्रामक मिससेलिंग को रोकना और डिस्ट्रीब्यूशन लागत को कम करना है।
क्या हैं मुख्य बदलाव?
प्रस्तावित नियमों के तहत, अब कमीशन सीधे पॉलिसी 'पर्सिस्टेंसी' (पॉलिसी को लंबे समय तक जारी रखने) से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में मिलने वाले भारी अपफ्रंट कमीशन पर रोक लगेगी, ताकि डिस्ट्रीब्यूटर्स सिर्फ सेल्स टारगेट के बजाय ग्राहकों की जरूरत पर ध्यान दें। रेगुलेटर ने लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए 'एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट' (EoM) की लिमिट घटाकर अगले 5 साल में 12.5% करने का लक्ष्य रखा है।
लोन के साथ इंश्योरेंस की जबरन बिक्री पर रोक
रेगुलेटर ने बैंकों के जरिए इंश्योरेंस बेचने वाले 'बैंकाश्योरेंस' मॉडल पर भी सख्त रुख अपनाया है। अब लोन के साथ इंश्योरेंस को जबरन बंडल (Bundling) करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। साथ ही, अब हर पॉलिसी के साथ सेल्स पर्सन को टैग करना अनिवार्य होगा, ताकि गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेचने पर कमीशन वापस (Clawback) लिया जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह खबर बीमा कंपनियों, ऑनलाइन एग्रीगेटर्स और बैंक-लेड डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल्स के लिए चिंताजनक है। शेयर बाजार में भी इस खबर के बाद बीमा सेक्टर के शेयरों में दबाव देखा गया है। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।
आम जनता और स्टेकहोल्डर्स 25 अक्टूबर 2026 तक इस प्रस्ताव पर अपनी राय दे सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे फाइनल गाइडलाइन्स और इसके लागू होने की टाइमलाइन पर बारीकी से नजर रखें।
