IRDAI ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए कमीशन और मैनेजमेंट खर्चों को सीमित करने का ड्राफ्ट जारी किया है। इस कदम से बैंकों, NBFCs और इंश्योरेंस कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।
रेगुलेटर का नया मास्टरप्लान
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 'रीकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन' नाम से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को गलत तरीके से बीमा उत्पाद बेचे जाने (mis-selling) पर रोक लगाना है। रेगुलेटर ने प्रस्ताव रखा है कि अब कमीशन और मैनेजमेंट खर्चों को एक तय दायरे में रखा जाएगा।
बैंकों और NBFCs के लिए बड़ा झटका
अब तक बैंक और NBFCs लोन के साथ इंश्योरेंस बंडलिंग करके मोटी कमीशन कमाते रहे हैं। IRDAI के इस ड्राफ्ट के बाद अनिवार्य प्रोडक्ट बंडलिंग पर रोक लग सकती है और बैंक कर्मचारियों के लिए वॉल्यूम-बेस्ड इंसेंटिव्स भी खत्म हो सकते हैं। यह उन बैंकों के लिए बड़ी चुनौती है जिनकी ऑपरेटिंग प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा इसी फीस-इनकम से आता है।
खर्चों की सीमा तय
रेगुलेटर ने 'एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट' (EoM) पर कड़ी लगाम लगाने की बात कही है। इसके तहत लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह खर्च 15% (अगले 2 साल में) और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए 20% (अगले 5 साल में) तक सीमित करने का प्रस्ताव है। कंपनियों के लिए अब अपने ऑपरेशनल खर्चों को नियंत्रित करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।
बाजार पर असर
इस खबर के सामने आते ही मार्केट में HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसे स्टॉक्स में हलचल देखी गई। निवेशक इस बात से चिंतित हैं कि अगर यह नियम लागू हुआ, तो इन कंपनियों की भविष्य की कमाई पर कितना असर पड़ेगा। हालांकि, अभी यह सिर्फ एक ड्राफ्ट है और स्टेकहोल्डर्स 25 अक्टूबर 2026 तक इस पर अपनी राय दे सकते हैं। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या रेगुलेटर इस बदलाव के लिए कोई ट्रांजिशन पीरियड देता है या नहीं।
