बीमा कंपनियों के लिए नए सैलरी नियम
भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे फाइनेंशियल ईयर 2027 से अपने मुख्य प्रबंधकीय कर्मियों (Key Managerial Personnel) की वेरिएबल पे का आधा हिस्सा सीधे पॉलिसी होल्डर के नतीजों पर आधारित परफॉरमेंस इंडिकेटर्स से जोड़ें। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एग्जीक्यूटिव्स का ध्यान ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने पर हो।
सैलरी स्ट्रक्चर में क्या है खास?
यह 50% वेरिएबल पे छह मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है: कंपनी की वित्तीय सेहत, प्रोडक्ट परफॉरमेंस, क्लेम को निपटाने की प्रक्रिया, शिकायतों का समाधान, इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स (Ind AS) को लागू करना और डिजिटल इंटरफेस में 'डार्क पैटर्न्स' (भ्रामक डिजाइन) को खत्म करना। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस स्ट्रक्चर में कई कमियां हैं।
जवाबदेही पर सवाल?
इंडस्ट्री के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस 'ग्राहक-केंद्रित' पे का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ रूटीन कामों से जुड़ा है। उदाहरण के लिए, Ind AS को लागू करने पर 10% और डिजिटल डार्क पैटर्न्स को हटाने पर 10% वेटेज मिलता है। ये दोनों ही काम ऐसे हैं जो पहले से ही नियमों के तहत जरूरी हैं। इसका मतलब है कि कुल पे का लगभग 40% हिस्सा ऐसे कामों के लिए मिलेगा जो सीधे ग्राहक सेवा से जुड़े नहीं हैं।
असल में, वेरिएबल पे का बहुत छोटा हिस्सा ही क्लेम सेटलमेंट में देरी या आंशिक भुगतान जैसे बड़े मुद्दों को सुलझाने से जुड़ा है, जो सीधे पॉलिसी होल्डर्स को प्रभावित करते हैं।
सिस्टम की दिक्कतें बनी हुई हैं
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि यह नया ढांचा बीमा क्षेत्र की गहरी समस्याओं का समाधान नहीं करता है। मेडिकल इन्फ्लेशन (Medical Inflation) का बढ़ना और कुछ खास तरह के इंश्योरेंस, जैसे मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस, की कीमतें सरकार द्वारा नियंत्रित होना, ऐसी चीजें हैं जो इंश्योरर के क्लेम रेश्यो (Claims Ratio) को सीधे तौर पर एग्जीक्यूटिव्स के कंट्रोल से बाहर प्रभावित करती हैं।
ऐसे रेश्यो से पे को जोड़ने पर एग्जीक्यूटिव्स को इन सिस्टमैटिक दिक्कतों के लिए गलत तरीके से दंडित किया जा सकता है। इससे कंपनियां या तो बहुत ज्यादा सतर्क होकर अंडरराइटिंग (Underwriting) कर सकती हैं, जो ग्राहकों को दूर कर सकता है।
पारदर्शिता और भविष्य का रास्ता
हालांकि, क्लेम और शिकायतों पर मंथली डिस्क्लोजर (Monthly Disclosure) से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन मार्केट अभी भी सतर्क है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इन नए हाई-फ्रीक्वेंसी डिस्क्लोजर्स के लिए कंपनियों को अपनी रिपोर्टिंग सिस्टम को अपग्रेड करना होगा।
इन पे रूल्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां असली सर्विस सुधार पर ध्यान देती हैं या सिर्फ रेगुलेटरी चेकलिस्ट को पूरा करती हैं। खासकर तब, जब इंडस्ट्री Ind AS और नए फॉरेन इन्वेस्टमेंट रूल्स के साथ तालमेल बिठा रही है।
