IRDAI द्वारा इंश्योरेंस कमीशन पर लगाई जा रही सीमा से बैंकिंग सेक्टर में हलचल है। Central Bank of India और Canara Bank जैसे बैंकों ने अपनी संभावित आय में बड़ी गिरावट का अनुमान जताया है, जिसके बाद बैंक अब वॉल्यूम बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने इंश्योरेंस पॉलिसी पर मिलने वाले कमीशन को सीमित करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों के लिए लागत कम करना और इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता लाना है। हालांकि, भारतीय बैंकों के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है। अधिकांश बैंक 'बैंकाश्योरेंस' मॉडल के जरिए इंश्योरेंस उत्पाद बेचकर अपनी नॉन-इंटरेस्ट इनकम का बड़ा हिस्सा कमाते हैं।
कमाई पर कितना पड़ेगा असर?
कई बैंकों ने अब इन नए नियमों के असर का आकलन करना शुरू कर दिया है। Central Bank of India के अनुसार, इंश्योरेंस सेल्स से होने वाली उनकी फी इनकम ₹76 करोड़ से घटकर ₹49 करोड़ रह सकती है, जो 33% की भारी गिरावट है। वहीं, Canara Bank ने अपनी कुल फी इनकम में ₹145 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया है। HDFC Bank ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए अभी कोई सटीक अनुमान नहीं दिया है।
बैंकों की नई रणनीति
नुकसान की भरपाई के लिए Axis Bank अब ज्यादा सेल्स वॉल्यूम पर फोकस कर रहा है। बैंक को उम्मीद है कि अगर कमीशन कम होने से इंश्योरेंस प्रीमियम गिरते हैं, तो डिमांड बढ़ेगी। Axis Bank अगले 6 से 9 महीने में अपना बिजनेस मॉडल एडजस्ट करने की तैयारी कर रहा है। सितंबर तिमाही में बैंक की नॉन-इंटरेस्ट अर्निंग ₹6,381 करोड़ रही थी, जो पिछले साल की तुलना में 6% ज्यादा थी।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि मार्जिन में कमी के बावजूद बैंक अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे बनाए रखते हैं। बैंकों का फोकस अब फी-बेस्ड सर्विसेज के विस्तार और प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव पर होगा। आने वाली तिमाहियों के नतीजे यह तय करेंगे कि बैंक इस नए रेगुलेटरी दबाव को कितनी मजबूती से झेल पाते हैं।
