IRDAI का नया प्रस्ताव: इंश्योरेंस कमीशन पर कैप से मचा हड़कंप, सेक्टर में विरोध के सुर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IRDAI का नया प्रस्ताव: इंश्योरेंस कमीशन पर कैप से मचा हड़कंप, सेक्टर में विरोध के सुर

इंश्योरेंस कंपनियां IRDAI के नए कमीशन कैप और डिस्ट्रीब्यूशन नियमों को लेकर चिंतित हैं। 25 अक्टूबर, 2026 तक फीडबैक की प्रक्रिया जारी है, जिससे शेयर बाजार और डिस्ट्रीब्यूटर्स में अनिश्चितता का माहौल है।

इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने सितंबर 2026 में 'रिकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन' नाम से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस प्रस्ताव का मकसद इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए प्रोडक्ट के हिसाब से कमीशन की सीमा तय करना और खर्चों पर लगाम लगाना है। यह कदम 2023 के उस उदारीकरण (Liberalization) को पलटने जैसा है, जिसमें प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए कमीशन की पाबंदियां हटाई गई थीं।

कंपनियों का विरोध क्यों?

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि कमीशन की एक जैसी सीमा (Uniform Cap) लागू करना व्यावहारिक नहीं है। बड़ी और पुरानी कंपनियां जिनके पास बड़ा नेटवर्क है, उन्हें फायदा होगा, लेकिन छोटी और नई कंपनियों के लिए कस्टमर एक्विजिशन की लागत बहुत अधिक है। एक्सपर्ट्स का तर्क है कि इससे छोटी कंपनियों का बिजनेस करना मुश्किल हो जाएगा।

हेल्थ और मोटर सेगमेंट में पेंच

रेगुलेटर ने हेल्थ इंश्योरेंस में डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटीज के लिए 15% और एजेंट्स के लिए 20% कमीशन कैप का सुझाव दिया है। वहीं, मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में यह लिमिट लगभग जीरो और 2.5% के आसपास रखी गई है। इंडस्ट्री का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस में अंडरराइटिंग और सर्विसिंग का काम ज्यादा कॉम्प्लेक्स होता है, इसलिए इसे मोटर इंश्योरेंस के बराबर नहीं रखा जा सकता।

इंटरमीडियरीज पर संकट और को-पेमेंट डिबेट

इस खबर से लिस्टेड इंश्योरेंस एग्रीगेटर्स और फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज के शेयरों पर दबाव है। यदि नए नियम लागू होते हैं, तो इन कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल को पूरी तरह बदलना पड़ सकता है। इसके अलावा, 10% का अनिवार्य को-पेमेंट (Co-payment) भी चर्चा का विषय है। हालांकि इसका मकसद प्रीमियम घटाना है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इससे महंगी और कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ पॉलिसीज का आकर्षण कम हो सकता है।

निवेशकों की नजरें अब 25 अक्टूबर, 2026 की डेडलाइन पर टिकी हैं, जब तक फीडबैक दिया जा सकता है। आने वाले समय में फाइनल रेगुलेशंस ही यह तय करेंगे कि इंश्योरेंस कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी का गणित क्या होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.