IRDAI के सख्त नियमों के चलते अब 29 में से 21 इंश्योरेंस कंपनियां 'Expenses of Management' (EOM) की तय सीमा के दायरे में आ गई हैं, जबकि FY24 में यह आंकड़ा सिर्फ 14 था।
इंश्योरेंस सेक्टर में अब अनुशासन का दौर है। Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) की सख्ती के चलते कंपनियों को अपने खर्चों पर लगाम लगानी पड़ रही है। FY26 के आंकड़ों के मुताबिक, 29 में से 21 कंपनियों ने तय EOM लिमिट का पालन किया है। EOM का मतलब है कि कंपनियां अपने प्रीमियम कलेक्शन के मुकाबले एडमिनिस्ट्रेशन, मार्केटिंग और कमीशन पर कितना खर्च कर सकती हैं।
कड़े कानून का असर
'सबका बीमा सबकी रक्षा एक्ट, 2025' के लागू होने के बाद रेगुलेटर की ताकत काफी बढ़ गई है। अब IRDAI के पास कमीशन और ऑपरेशनल खर्चों पर बारीकी से नजर रखने का अधिकार है। स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने इस मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया है, जहां अब हर कंपनी नियमों के दायरे में है, जबकि दो साल पहले सिर्फ 1 कंपनी अनुपालक थी।
जनरल इंश्योरेंस कंपनियों की चुनौती
जनरल इंश्योरेंस का सेगमेंट थोड़ा उलझा हुआ है। यहां 20 में से 14 कंपनियां ही तय लिमिट में हैं। पूरे सेक्टर का वेटेड एवरेज EOM रेशियो 30.4% है, जो रेगुलेटर की 30% की सीलिंग से थोड़ा ऊपर है। ICICI Lombard, Bajaj General, Tata AIG और HDFC Ergo जैसे बड़े नाम फिलहाल नियमों का पालन कर रहे हैं, लेकिन इनका औसत रेशियो बढ़कर 29.7% तक पहुंच गया है।
कार्रवाई और भविष्य की राह
IRDAI अब एक्शन के मूड में है। हाल ही में नियमों का पालन न करने वाली 4 कंपनियों पर 6 महीने तक नई शाखाएं खोलने पर रोक लगाई गई थी। Acko, Navi General और Zuno जैसी छोटी कंपनियों ने भी अपने खर्च घटाने शुरू कर दिए हैं। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि इन खर्चों पर रोक से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर क्या असर पड़ता है और आगे चलकर कमीशन स्ट्रक्चर में क्या बदलाव आते हैं।
