IRDAI का नया फरमान: Niva Bupa और PB Fintech की बदल रही रणनीति, निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

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AuthorMehul Desai|Published at:
IRDAI का नया फरमान: Niva Bupa और PB Fintech की बदल रही रणनीति, निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

IRDAI ने बीमा कंपनियों के लिए खर्चों (Expenses) पर लगाम लगाने के नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इस बदलाव के बाद Niva Bupa अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर ध्यान दे रही है, जबकि PB Fintech अपने मार्केटिंग खर्च को घटाकर एक अनुशासित विकास मॉडल की ओर बढ़ रही है।

इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता और एफिशिएंसी लाने के लिए एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) पर नए कड़े नियम पेश किए हैं। इसका सीधा असर बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ेगा।

क्या हैं नए नियम?

प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए EoM लिमिट को अगले 2 साल में घटाकर 15% और 5 साल के भीतर 12.5% करने का लक्ष्य है। वहीं, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह सीमा 30% से घटाकर 25% और अंततः 20% तक सीमित कर दी जाएगी।

Niva Bupa का स्टैंड

Niva Bupa इन बदलावों को लेकर काफी सहज है। कंपनी का फोकस 'ऑपरेशनल लेवरेज' पर है, यानी बिजनेस की ग्रोथ खर्चों की तुलना में काफी तेज हो। कंपनी की योजना प्रीमियम कीमतों को स्थिर रखने की है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक जुड़ें। निवेशक अब कंपनी के FY29 के लक्ष्यों पर नजर रख रहे हैं, जिसमें 99% का कंबाइंड इंश्योरेंस सर्विस रेशियो हासिल करना शामिल है।

PB Fintech (PolicyBazaar) में बदलाव

नियमों के दबाव के बीच PB Fintech अब 'हाई-कॉस्ट ग्रोथ' की पुरानी रणनीति को छोड़कर एक अनुशासित मॉडल अपना रही है। कंपनी मार्केटिंग खर्चों में कटौती कर रही है और नई भर्तियां धीमी कर दी हैं। अब PB Fintech अपने रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए इंश्योरेंस मैन्युफैक्चरिंग और री-इंश्योरेंस ब्रोकिंग जैसे नए क्षेत्रों पर भी विचार कर रही है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये कंपनियां नए नियमों के तहत अपने मार्जिन को बरकरार रख पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.