IRDAI के सितंबर **2026** के नए प्रस्ताव ने इंश्योरेंस मार्केट में हलचल मचा दी है। डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन पर कैप (Cap) लगाने की इस योजना का ब्रोकरेज और बैंकिंग सेक्टर कड़ा विरोध कर रहे हैं, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI द्वारा लाए गए 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' पेपर पर 31 अक्टूबर 2026 को कंसल्टेशन पीरियड खत्म हो चुका है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य इंश्योरेंस खरीदने की लागत को कम करना और 'सबका बीमा सबकी रक्षा' विजन को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके तरीकों पर इंडस्ट्री के दिग्गज सवाल उठा रहे हैं।
मार्केट का नया ढांचा और विवाद
प्रस्ताव में इंश्योरेंस मार्केट को तीन मुख्य हिस्सों में बांटने की बात कही गई है: इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटीज (IDEs), इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन पर्सन्स (IDPs) और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs)। विवाद की जड़ यह है कि कमीशन कैप को 'डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल' से जोड़ दिया गया है, न कि 'एक्टिविटी' से।
इंडिपेंडेंट ब्रोकर और वेब एग्रीगेटर, जो ग्राहकों को पारदर्शिता देने के लिए काफी खर्च करते हैं, उन्हें आशंका है कि उन्हें कैप्टिव एजेंसी मॉडल की तुलना में कम कमीशन मिलेगा। इससे मार्केट में एक अनफेयर कॉम्पिटिशन बन सकता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
कई लिस्टेड बैंक, फिनटेक कंपनियां और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस का एक बड़ा रेवेन्यू इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से आता है। अगर कमीशन कैप को लेकर सख्त नियम लागू होते हैं, तो इन कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि इंडिपेंडेंट ब्रोकर कमजोर होते हैं, तो कंज्यूमर्स के लिए विकल्प कम होने का भी खतरा है।
फाइनल रेगुलेशन का इंतजार
IRDAI चेयरमैन अजय सेठ ने संकेत दिए हैं कि इंडस्ट्री को तालमेल बिठाने के लिए ट्रांजिशन पीरियड दिया जा सकता है। फिलहाल निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि फाइनल नोटिफिकेशन में कमीशन कैप का फॉर्मूला क्या होगा और क्या पुरानी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कोई 'ग्रैंडफादरिंग क्लॉज' (Grandfathering clause) रखा जाएगा या नहीं।
