IRDAI ने सितंबर 2026 में इंश्योरेंस कमीशन और मैनेजमेंट खर्चों पर लगाम लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे बाजार में बिकवाली का माहौल है। डिजिटल एग्रीगेटर्स और बैंक जो इंश्योरेंस बेचते हैं, उनकी कमाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बाजार की चिंता और डिस्ट्रीब्यूशन पर असर
23 सितंबर 2026 को IRDAI द्वारा जारी किए गए कंसल्टेशन पेपर ने बाजार में हलचल पैदा कर दी है। रेगुलेटर चाहता है कि इंश्योरेंस इंडस्ट्री आक्रामक बिक्री (sales) के मॉडल से हटकर पूरी तरह ग्राहक केंद्रित (customer-centric) वैल्यू पर फोकस करे। इसका असर उन कंपनियों पर सबसे ज्यादा दिख रहा है जो इंश्योरेंस उत्पादों को बेचने पर निर्भर हैं। इसमें डिजिटल एग्रीगेटर्स, इंश्योरेंस ब्रोकर्स और बैंक शामिल हैं। बैंक अपनी 'बैंकेश्योरेंस' (Bancassurance) मॉडल के जरिए भारी कमीशन कमाते हैं, और अगर यह कमीशन लिमिट तय होती है, तो उनकी फीस से होने वाली आय में भारी कटौती तय है।
प्रस्ताव में क्या है खास?
रेगुलेटर का मुख्य उद्देश्य 'मिस-सेलिंग' को रोकना है। प्रस्ताव के मुताबिक, लाइफ इंश्योरेंस के लिए पहले साल का कमीशन अधिकतम 20% तक सीमित किया जा सकता है। इसके अलावा, अगले 5 सालों में 'एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट' लिमिट को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा, जो लाइफ इंश्योरर के लिए 12.5% और जनरल इंश्योरेंस के लिए 20% पर तय करने का सुझाव दिया गया है।
आगे क्या उम्मीद करें?
अभी यह प्रस्ताव फाइनल कानून नहीं है। IRDAI ने जनता और स्टेकहोल्डर्स से 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं। निवेशकों को अब प्रमुख इंश्योरेंस कंपनियों और बैंकों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे अपने ऑपरेशनल खर्चों को कम करके या अपने प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव करके इस नुकसान की भरपाई कैसे करते हैं।
