IIFL ग्रुप के फाउंडर निर्मल जैन का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में RBI के संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी (Rate Hikes) को झेलने की पूरी क्षमता है। हालांकि, ग्रुप को अपनी होम फाइनेंस सब्सिडियरी के लिए हाल ही में मिले भारी भरकम टैक्स नोटिस जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
IIFL ग्रुप के फाउंडर निर्मल जैन के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था RBI द्वारा ब्याज दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को आसानी से पचा सकती है। जैन का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल तनाव जैसे बाहरी दबावों के बावजूद, भारत की ग्रोथ स्टोरी के मुख्य पिलर—जैसे फाइनेंशियललाइजेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च—पूरी तरह सुरक्षित हैं।
जैन ने स्पष्ट किया कि हालांकि हाई-इंटरेस्ट रेट साइकल से फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की फंडिंग कॉस्ट बढ़ सकती है, लेकिन देश का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग सिस्टम इसे संभालने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, अब निवेशकों का ध्यान सिर्फ वैल्यूएशन पर नहीं, बल्कि कंपनी की कंसिस्टेंट अर्निंग पर होना चाहिए।
IIFL Finance का प्रदर्शन
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार शुरुआत की है। IIFL Finance का नेट प्रॉफिट (PAT) ₹713 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 14% की बढ़त दिखाता है। कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी ₹1.15 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर चुके हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी और चुनौतियां
ग्रोथ के आंकड़ों के बीच निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए। अगस्त 2026 में, कंपनी की सब्सिडियरी IIFL Home Finance को ₹963.39 करोड़ का भारी टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। यह मामला कंपनी की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, गोल्ड और रिटेल लोन सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्राइसिंग का दबाव भी एक बड़ा फैक्टर है।
निर्मल जैन ने गवर्नेंस और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर जोर देते हुए कहा कि पहले की रेगुलेटरी बाधाओं (RBI का गोल्ड लोन पर लगा प्रतिबंध) से सीखते हुए कंपनी ने अपने इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस में बड़े बदलाव किए हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इस टैक्स विवाद को कैसे सुलझाती है और आने वाली तिमाहियों में अपने एसेट क्वालिटी को कैसे बनाए रखती है।
