IIFL Finance के शेयर 8% गिरे, ₹963 करोड़ के टैक्स डिमांड से हड़कंप

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
IIFL Finance के शेयर 8% गिरे, ₹963 करोड़ के टैक्स डिमांड से हड़कंप

IIFL Finance के निवेशकों के लिए बुरी खबर आई है। कंपनी की सब्सिडियरी IIFL Home Finance को ₹963.39 करोड़ का टैक्स डिमांड नोटिस मिला है, जिसके बाद IIFL Finance के शेयरों में मंगलवार को **5%** से लेकर **8%** तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह मामला 2018 से 2025 तक की टैक्स फाइलिंग से जुड़ा है और कंपनी इस नोटिस को चुनौती देने की तैयारी में है।

क्या है पूरा टैक्स विवाद?

IIFL Finance के शेयरों में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत में 8% तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसका मुख्य कारण कंपनी की एक अहम सब्सिडियरी, IIFL Home Finance, को मिले ₹963.39 करोड़ के टैक्स डिमांड नोटिस को माना जा रहा है। टैक्स अधिकारियों ने अप्रैल 2018 से फरवरी 2025 तक की अवधि के लिए यह डिमांड जारी की है।

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, इस टैक्स डिमांड के पीछे कई इनकम कैटेगरी हैं। इसमें ओवरराइडिंग कमीशन इनकम से जुड़े लगभग ₹490 करोड़ और इंटरेस्ट स्ट्रिप एसेट्स से संबंधित ₹392 करोड़ शामिल हैं। इसके अलावा, टैक्स अधिकारियों ने लगभग ₹305 करोड़ के कुछ व्यावसायिक खर्चों को भी डिसअलाउ (disallow) किया है और ₹53 करोड़ के ESOP खर्चों पर भी सवाल उठाए हैं। इन सबको मिलाकर यह बड़ी टैक्स डिमांड बनी है, जिसमें लागू सेस और सरचार्ज भी शामिल हैं।

कंपनी का क्या है कहना?

IIFL Home Finance ने टैक्स अधिकारियों के इन निष्कर्षों को सिरे से खारिज कर दिया है और वे इस ऑर्डर को अपील और रेक्टिफिकेशन (rectification) के जरिए चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। कंपनी का कहना है कि जिस इनकम (खासकर ओवरराइडिंग कमीशन और इंटरेस्ट स्ट्रिप्स) पर टैक्स मांगा गया है, उस पर पहले के असेसमेंट में टैक्स पहले ही चुकाया जा चुका है। मैनेजमेंट का यह भी तर्क है कि टैक्स अधिकारियों ने ब्लॉक असेसमेंट के दौरान कंपनी के लिए उपलब्ध प्रासंगिक टैक्स क्रेडिट्स पर ध्यान नहीं दिया।

पहले से जारी हैं टैक्स मामले

यह नया मामला कंपनी के लिए पहले से चल रहे रेगुलेटरी और टैक्स संबंधी अनिश्चितताओं को और बढ़ा देता है। इससे पहले मई 2026 में, IIFL Finance को ₹475.56 करोड़ का एक और टैक्स डिमांड नोटिस मिला था। उस पुराने मामले के प्रभाव को मैनेज करने के लिए, कंपनी ने आंशिक भुगतान की सहमति देकर रिकवरी पर स्टे (stay) हासिल किया था। इस व्यवस्था के तहत, IIFL Finance ने अगस्त 2026 में ₹5 करोड़ की शुरुआती किश्त का भुगतान कर दिया है और बाकी 5% विवादित राशि का भुगतान 15 दिसंबर 2026 तक किश्तों में करने की योजना है। यह स्टे 2026 के अंत तक या जब तक अपील अथॉरिटी मामले का समाधान नहीं कर देती, तब तक प्रभावी रहेगा।

निवेशकों की चिंता

निवेशकों के लिए मुख्य चिंता इन लगातार चल रहे टैक्स विवादों के संभावित वित्तीय और ऑपरेशनल प्रभाव को लेकर है। हालांकि IIFL Finance और उसकी सब्सिडियरी अपने पक्ष की कानूनी मजबूती को लेकर आश्वस्त हैं, लेकिन लिटिगेशन (litigation) के दौरान एडमिनिस्ट्रेटिव बर्डन (administrative burden) और संभावित कैश आउटफ्लो (cash outflow) जैसे कारक हैं जिन पर बाजार अभी गौर कर रहा है। कंपनी का कहना है कि इन मुद्दों का उनके ऑपरेशंस पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है, लेकिन यह सेक्टर रेगुलेटरी डेवलपमेंट के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।

शेयरधारकों के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम अपील प्रक्रियाओं का नतीजा होगा। निवेशक यह भी देखेंगे कि कंपनी का कैश फ्लो इन टैक्स देनदारियों को संभालने के लिए पर्याप्त रहता है या नहीं, जबकि वे कानूनी रास्ता अपना रहे हैं। कंपनी की वित्तीय स्थिरता को समझने के लिए इन असेसमेंट्स के संबंध में किसी भी आगे के रेगुलेटरी अपडेट पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.