IIFL Finance: ₹10,000 करोड़ जुटाएगी कंपनी! NCDs जारी करने की तैयारी

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AuthorMehul Desai|Published at:
IIFL Finance: ₹10,000 करोड़ जुटाएगी कंपनी! NCDs जारी करने की तैयारी
Overview

IIFL Finance अपने फाइनेंस कमेटी की मीटिंग **24 फरवरी 2026** को रखेगी। इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा प्राइवेट प्लेसमेंट के ज़रिए नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करना है। यह कदम कंपनी की **₹10,000 करोड़** की बड़ी फंड जुटाने की योजना का हिस्सा है।

IIFL Finance Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की फाइनेंस कमेटी 24 फरवरी 2026 को बैठेगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने की शर्तों को अंतिम रूप देना और मंजूरी देना है। यह कदम कंपनी की ₹10,000 करोड़ की बड़े फंड जुटाने की व्यापक वित्तीय रणनीति का एक अहम हिस्सा है, जिसकी घोषणा मई 2025 में की गई थी।

हाल ही में, कंपनी ने ₹2,000 करोड़ के सिक्योरड, लिस्टेड, रिडीमेबल NCDs का पब्लिक इश्यू सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह इश्यू 17 फरवरी 2026 को खुला था और 4 मार्च 2026 को बंद हुआ। निवेशकों को 24, 36 और 60 महीनों की अवधि के विकल्प मिले, जिनके लिए कूपन रेट लगभग 8.37% से 9.00% प्रति वर्ष तक था। इन NCDs को CRISIL रेटिंग्स से 'AA/Stable' और Brickwork Ratings से 'AA+/Stable' जैसी मजबूत क्रेडिट रेटिंग्स मिलीं, जो कंपनी की वित्तीय देनदारियों को समय पर चुकाने की क्षमता को दर्शाती हैं।

नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) क्या होते हैं?

NCDs ऐसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) हैं जिन्हें कंपनियां पैसा जुटाने के लिए जारी करती हैं। ये कन्वर्टिबल डिबेंचर्स से अलग होते हैं, क्योंकि इन्हें कंपनी के शेयर्स (Shares) में बदला नहीं जा सकता। सीधे शब्दों में, ये निवेशकों से लिया गया एक तरह का लोन होता है, जिस पर कंपनी एक तय ब्याज (Coupon Rate) देती है और एक निश्चित समय के बाद मूलधन वापस कर देती है। IIFL Finance अपनी पूंजी (Capital Base) को मजबूत करने और अपने लेंडिंग ऑपरेशंस को फंड करने के लिए इन इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग कर रही है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति पर एक नज़र:

IIFL Finance का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) मार्च 2025 तक लगभग 4.17 गुना था। हालांकि, कंपनी के पास पर्याप्त पूंजी है, जिसमें दिसंबर 2025 तक 12.8% का स्टैंडअलोन टियर 1 रेशियो (Tier 1 Ratio) शामिल है। कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹98,336 करोड़ हो गई थी। मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने ₹410 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया था, लेकिन FY26 की तीसरी तिमाही में ₹501.35 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) कमाकर मुनाफावसूली (Recovery) का संकेत दिया है।

निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

  • नकारात्मक इतिहास / रेड फ्लैग्स (Red Flags):
    • फरवरी 2026 में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने IIFL Finance पर ₹5.30 लाख का जुर्माना लगाया था, क्योंकि कंपनी ने रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) के दौरान कुछ लोन एकाउंट्स को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) के रूप में सही ढंग से क्लासिफाई नहीं किया था। कंपनी का कहना है कि इस जुर्माने का कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
    • इसके अलावा, SEBI ने अगस्त 2024 में IIFL ग्रुप की ही एक अन्य कंपनी IIFL Securities पर स्टॉक ब्रोकर नियमों के उल्लंघन के लिए ₹11 लाख का जुर्माना लगाया था।
    • क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां (Credit Rating Agencies) भी मिली-जुली राय दे रही हैं। ICRA की IIFL Finance के NCDs के लिए वर्तमान रेटिंग 'AA (Negative)' है, और एजेंसी ने मार्च 2024 में कंपनी की लॉन्ग-टर्म रेटिंग्स को 'Rating Watch with Negative Implications' के तहत रखा था।
    • कंपनी ने अपने टियर 1 कैपिटल की तुलना में "साइजएबल नेट वल्नरेबल एसेट्स" (Sizeable net vulnerable assets) का भी उल्लेख किया है।
    • प्रमोटर्स की अपेक्षाकृत कम शेयरहोल्डिंग (लगभग 24.85%) और कंपनी के "लो इंटरेस्ट कवरेज रेशियो" (Low interest coverage ratio) पर भी निवेशकों की नज़र रहेगी।

आगे की राह (Forward View):

IIFL Finance के लिए चल रहे NCD इश्यूज़ उसकी ग्रोथ को बनाए रखने और लेंडिंग टारगेट्स को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। निवेशक प्राइवेट प्लेसमेंट के लिए तय की जाने वाली खास शर्तों और ब्याज दरों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। साथ ही, कंपनी की ऊंचे डेट लेवल को मैनेज करने और अपनी देनदारियों को पूरा करने की क्षमता पर भी ध्यान दिया जाएगा। आने वाली तिमाहियों में मुनाफे और एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार देखना महत्वपूर्ण होगा।

प्रतियोगियों से तुलना (Peer Comparison):

IIFL Finance की तरह, भारत में कई नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) अपने लोन बुक को फंड करने के लिए NCDs के ज़रिए बड़ा डेट कैपिटल जुटाती हैं। उनके प्रतियोगी भी लगातार डेट मार्केट्स का सहारा ले रहे हैं:

  • Bajaj Finance, एक प्रमुख कंपनी, ने फरवरी 2026 में बॉन्ड बिक्री (Bond Sales) के ज़रिए ₹2,500 करोड़ जुटाए थे और नवंबर 2025 में ₹1,835 करोड़ के बॉन्ड भी जारी किए थे।
  • LIC Housing Finance ने 5 साल के बॉन्ड के ज़रिए ₹1,050 करोड़ जुटाए थे।
  • HDFC Bank सालाना औसतन लगभग ₹19,500 करोड़ के लॉन्ग-टर्म डेट इश्यूज़ करती है।

हालांकि HDFC Bank और Bajaj Finance जैसे प्रतिस्पर्धी भी बॉन्ड जारी कर रहे हैं, IIFL Finance का NCDs पर फोकस ग्रोथ के लिए रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों से फंडिंग जुटाने की उसकी रणनीति के अनुरूप है। IIFL Finance द्वारा अपने NCDs पर दी जा रही ब्याज दरें (लगभग 9.00%-10.25%) मौजूदा मार्केट के समान रेटेड डेट इंस्ट्रूमेंट्स के मुकाबले प्रतिस्पर्धी हैं।

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