IIFL Finance के मुनाफे में 'गोल्ड' लगा, पर इन Risky बातों से निवेशकों को रहना होगा सावधान!

BANKINGFINANCE
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AuthorAditya Rao|Published at:
IIFL Finance के मुनाफे में 'गोल्ड' लगा, पर इन Risky बातों से निवेशकों को रहना होगा सावधान!
Overview

IIFL Finance के निवेशकों के लिए अप्रैल 2026 को खत्म हुई चौथी तिमाही (Q4) शानदार रही। कंपनी ने **₹586.8 करोड़** का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी बड़ा उछाल है। इस जबरदस्त ग्रोथ का मुख्य कारण कंपनी का गोल्ड लोन बिजनेस रहा, जिसमें **150%** की तूफानी तेजी देखने को मिली।

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गोल्ड लोन की बहार, कंपनी की चांदी!

IIFL Finance ने 29 अप्रैल 2026 को अपने चौथे तिमाही के नतीजे जारी किए, जिसने शेयर बाजार में हलचल मचा दी। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹586.8 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹207.7 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी 42.5% बढ़कर ₹3,693 करोड़ पर पहुंच गया। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे की सबसे बड़ी वजह कंपनी का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो रहा, जिसके एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 150% का भारी उछाल आया और यह ₹52,581 करोड़ को पार कर गया। खास बात यह है कि गोल्ड लोन सेगमेंट में बैड लोन (GNPA) का अनुपात सिर्फ 0.35% रहा। वहीं, कंपनी की कुल एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा, कुल GNPA घटकर 1.5% और नेट NPA 0.7% पर आ गया। इन नतीजों के बाद NSE पर IIFL Finance के शेयर 2.5% चढ़कर ₹449.00 पर बंद हुए।

क्या गोल्ड पर ज़्यादा निर्भरता है एक बड़ी चूक?

IIFL Finance का यह फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) गोल्ड लोन पर ज़ोरदार फोकस दिखाता है। भारत में इस सेगमेंट में ज़बरदस्त ग्रोथ है और NBFC सेक्टर भी मजबूती दिखा रहा है। उम्मीद है कि इस फाइनेंशियल ईयर में AUM में करीब 13% की वृद्धि होगी। हालांकि, IIFL की स्ट्रैटेजी में एक बड़ा कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) है। गोल्ड लोन ही कंपनी के विस्तार का मुख्य इंजन बना हुआ है। इसकी तुलना में, Bajaj Finance जैसी अधिक विविध NBFCs ने 22% का AUM ग्रोथ दर्ज किया है। IIFL Finance का P/E रेश्यो (Ratio) लगभग 14.4x है, जो इंडियन डाइवर्सिफाइड फाइनेंशियल इंडस्ट्री के औसत 23.9x और पीयर्स (Peers) के औसत 15.4x से कम है। यह वैल्यूएशन गैप बताता है कि निवेशक कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी को तो देख रहे हैं, लेकिन इसके केंद्रित बिजनेस मॉडल और पिछले रेगुलेटरी मुद्दों से जुड़े रिस्क को भी फैक्टर कर रहे हैं।

रेगुलेटरी मुद्दे और सोने की कीमतों का उतार-चढ़ाव

ज़बरदस्त तिमाही नतीजों के बावजूद, IIFL Finance के सामने कई बड़े रिस्क बने हुए हैं। कंपनी सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील है, जिससे लोन वैल्यू पर असर पड़ सकता है और संभावित नुकसान के लिए ज़्यादा प्रोविज़न (Provision) रखना पड़ सकता है। मार्च 2024 में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अनुपालन संबंधी चिंताओं के चलते गोल्ड लोन बांटने पर रोक लगा दी थी, हालांकि सितंबर 2024 में यह प्रतिबंध हटा लिया गया। इसके अलावा, हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग की ओर से एक ऑडिट चल रहा है, जिससे भविष्य में और भी कंप्लायंस (Compliance) मुद्दे या वित्तीय समस्याएं सामने आ सकती हैं, जो कंपनी के ऑपरेशन और निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.