IIFL Finance ₹1,000 करोड़ जुटाएगी, ग्रोथ के लिए बड़ा कदम! जानें क्यों हो रहा है ये इश्यू

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IIFL Finance ₹1,000 करोड़ जुटाएगी, ग्रोथ के लिए बड़ा कदम! जानें क्यों हो रहा है ये इश्यू
Overview

IIFL Finance ने **₹1,000 करोड़** के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने का ऐलान किया है। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपने विस्तार (Growth) और बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए करेगी। यह सीनियर, सिक्योर्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी किए जाएंगे और NSE पर लिस्ट होंगे।

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IIFL Finance के लिए ₹1,000 करोड़ का कैपिटल बूस्ट

IIFL Finance के फाइनेंस कमेटी ने ₹1,000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने को हरी झंडी दे दी है। इस इश्यू का बेस साइज ₹500 करोड़ है, जिसमें ₹500 करोड़ का ओवरसब्सक्रिप्शन (Green Shoe Option) रखने का विकल्प भी शामिल है। ये डिबेंचर्स सीनियर, सिक्योर्ड, लिस्टेड, रेटेड और रिडीमेबल डेट इंस्ट्रूमेंट्स होंगे, जिन्हें सीरीज D36 नाम दिया गया है। इन्हें प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर जारी किया जाएगा और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट किया जाएगा।

क्यों उठाया यह कदम?

NBFCs के लिए NCDs के जरिए डेट कैपिटल जुटाना एक आम बात है। IIFL Finance इस पूंजी का इस्तेमाल अपने लेंडिंग ऑपरेशंस को फंड करने, लिक्विडिटी को मैनेज करने और अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए करेगी। NSE पर लिस्टिंग से निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनी को भविष्य में और बेहतर दरों पर पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है।

RBI के प्रतिबंधों के बाद बड़ा कदम

यह कदम ऐसे समय में आया है जब मार्च 2024 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे। RBI ने रिस्क असेसमेंट और लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो में गड़बड़ी का हवाला दिया था। इसके बाद से IIFL Finance अपनी आंतरिक कंट्रोल और गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए सुधारात्मक उपाय कर रही है। इस फंड जुटाने से कंपनी की बैलेंस शीट में लिक्विडिटी बढ़ेगी, जो ऑपरेशन और ग्रोथ के लिए एक बफर का काम करेगी।

निवेश पर रखें नज़र:

हालांकि, एक बात का ध्यान रखना होगा कि अगर ब्याज या प्रिंसिपल पेमेंट में तीन महीने से अधिक की देरी होती है, तो 2% प्रति वर्ष का अतिरिक्त ब्याज लगाया जाएगा। इसके अलावा, RBI के प्रतिबंधों का असर और कंपनी की साख (Credit Profile) पर इसका प्रभाव देखना बाकी है, जिससे भविष्य में उधार लेने की लागत (Borrowing Costs) बढ़ सकती है। Bajaj Finance, Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसे दूसरे NBFCs भी अपने विस्तार के लिए NCDs जैसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स का सहारा लेते हैं। IIFL Finance का यह कदम इंडस्ट्री प्रैक्टिस के अनुरूप है, लेकिन उसकी हालिया रेगुलेटरी चुनौतियों के चलते यह देखना होगा कि क्या वह प्रतिस्पर्धी दरों पर पूंजी जुटा पाती है।

FY23 के अंत तक, IIFL Finance का कुल कर्ज, उसके शेयरधारकों की पूंजी (Shareholder's Capital) के मुकाबले 5.0x था, जो NBFC सेक्टर में आम लीवरेज (Leverage) को दर्शाता है।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को अब NCDs के लिए Key Information Document (KID) का इंतजार रहेगा, जिसमें टेन्योर, कूपन रेट, मैच्योरिटी डेट्स जैसी जानकारी होगी। सब्सक्रिप्शन लेवल, RBI के मुद्दों का समाधान और मैनेजमेंट की भविष्य की योजनाओं पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.