नतीजों पर एक नज़र
कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही में ₹115 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹128 करोड़ से कम है। वहीं, नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) 17.7% बढ़कर ₹581.55 करोड़ हो गई, और ऑपरेटिंग रेवेन्यू (Operating Revenue) 20% की बढ़ोतरी के साथ ₹644 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी बढ़कर ₹2,29,582 करोड़ हो गया है। इन ग्रोथ के बावजूद, शेयर की कीमत हाल ही में ₹312-₹314 के आसपास ट्रेड कर रही है, और कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) लगभग ₹9,700 करोड़ है। शेयर का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 17x से 22x के बीच है, जो गिरते मुनाफे के सामने निवेशकों के उत्साह को दर्शाता है।
स्ट्रैटेजिक निवेशकों की बढ़ती रुचि
IIFL Capital, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर (Financial Services Sector) में एक मजबूत स्थिति रखती है, जहाँ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) के 15-17% तक बढ़ने का अनुमान है। कंपनी के क्रेडिट ऑपर्च्युनिटीज़ फंड (Credit Opportunities Fund) ने हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और फैमिली ऑफिस से ₹500 करोड़ जुटाए हैं, जिसमें से ₹75 करोड़ पहले ही निवेश किए जा चुके हैं। कंपनी की इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (Investment Banking) शाखा ने Amagi Media Labs और Aye Finance के IPOs सहित नौ डील्स सफलतापूर्वक पूरी की हैं। यह भी खबरें हैं कि TPG और Bain Capital, IIFL Capital में 20% तक की हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रहे हैं, जो कंपनी में मजबूत रणनीतिक रुचि को दर्शाता है।
एनालिस्ट्स ने जताई वैल्यूएशन को लेकर चिंता
हालांकि, वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। GuruFocus ने स्टॉक को 'Significantly Overvalued' यानी 'काफी महंगा' बताया है, जिसका मौजूदा भाव उसके अनुमानित GF वैल्यू ₹212.17 से 52% ऊपर है। ICICI Direct ने 'HOLD' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹65.0 रखा है, जो FY25 अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के अनुमानित 7.2 गुना के आसपास है। StockInvest.us का अनुमान है कि अगले तीन महीनों में शेयर में 8.06% की गिरावट आ सकती है, क्योंकि उन्होंने 'Sell' सिग्नल दिया है। कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 30.9% है। Crisil ने 'AA-' रेटिंग की पुष्टि की है, लेकिन वे कैपिटल मार्केट्स की अनिश्चितताओं को भी स्वीकार करते हैं, जो रेगुलेटरी बदलावों और मार्केट साइकल्स के अधीन होती हैं।
आगे क्या?
NBFC सेक्टर रिटेल और MSMEs को उधार देने से लगातार बढ़ रहा है। IIFL Capital की विविध सेवाएं इस ट्रेंड से लाभान्वित हो सकती हैं। लेकिन, निवेशकों की भावना बंटी हुई है, जिसमें एनालिस्ट्स के 'Bearish' टारगेट और संभावित रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री के बीच विरोधाभास है। बढ़ती एसेट्स और रेवेन्यू को लगातार प्रॉफिट ग्रोथ में बदलने की कंपनी की क्षमता, उसके मौजूदा मार्केट वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
