कंसोलिडेशन छोड़, अब ग्रोथ की राह पर Sammaan Capital
यह कैपिटल इंफ्यूजन Sammaan Capital के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। अबू धाबी के IHC Group ने कंपनी (जो पहले Indiabulls Housing Finance के नाम से जानी जाती थी) में 41.5% की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी करीब $1 अरब (लगभग ₹8,850 करोड़) में खरीदी है। इस डील से कंपनी आठ साल के कंसोलिडेशन और मुश्किलों के दौर को पीछे छोड़कर अब आक्रामक विस्तार की राह पर चल पड़ी है। CEO गगन बंगा ने कहा कि यह नया कैपिटल, IHC के मजबूत सपोर्ट के साथ, शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है। Sammaan Capital का लक्ष्य अगले 3 सालों में अपने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को मौजूदा करीब ₹65,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1.3 लाख करोड़ तक ले जाना है। इसके लिए कंपनी पर्सनल लोन, गोल्ड-बैकड लोन और छोटे बिजनेसेज, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) फाइनेंसिंग जैसे सेक्टर्स पर फोकस करेगी। इस डील के बाद IHC Group कंपनी का प्रमोटर बनेगा और बोर्ड में मेजॉरिटी डायरेक्टर्स की नियुक्ति के अधिकार रखेगा।
मजबूत कैपिटल बेस और भविष्य की योजनाएं
इस बड़े निवेश से Sammaan Capital की बैलेंस शीट काफी मजबूत होगी। कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) जो अभी 20% से ऊपर है, वो बढ़कर 30% के पार चला जाएगा। यह मजबूत कैपिटल बफर अगले 5 सालों तक बिना किसी और इक्विटी डाइल्यूशन के ग्रोथ को सपोर्ट करेगा। कंपनी की पहली प्राथमिकता अगले 2-3 सालों में अपने प्रोडक्ट, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और ऑपरेशनल सिस्टम्स को ऑर्गेनिकली बढ़ाना होगा। किसी भी तरह के इनऑर्गेनिक ग्रोथ (विलय या अधिग्रहण) पर बाद में विचार किया जाएगा।
रेगुलेटरी मंजूरी और वर्तमान वैल्यूएशन
Competition Commission of India (CCI) और Reserve Bank of India (RBI) से इस अधिग्रहण को मंजूरी मिल चुकी है। RBI ने कुछ स्टैंडर्ड शर्तें रखी हैं, जैसे कंपनी पब्लिक से डिपॉजिट नहीं ले सकेगी और स्टेक 26% से नीचे जाने पर RBI की मंजूरी लेनी होगी। Sammaan Capital फिलहाल NSE और BSE पर लिस्टेड है, जिसका मार्केट कैप करीब ₹12,400 करोड़ है और P/E रेश्यो लगभग 9.67 है।
NBFC सेक्टर का आउटलुक और चुनौतियां
भारतीय NBFC सेक्टर के लिए आने वाले समय में ग्रोथ की अच्छी उम्मीदें हैं। अनुमान है कि FY26 में यह सेक्टर 12-18% की दर से बढ़ेगा, जो बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ से ज्यादा है। रिटेल लेंडिंग, MSME फाइनेंसिंग और गोल्ड लोन जैसे सेगमेंट इसमें मुख्य भूमिका निभाएंगे। हालांकि, सेक्टर को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है, जैसे FY26 में ग्रोथ का धीमा पड़ना, बैंकों से फंड की कमी, और माइक्रोफाइनेंस व अनसिक्योर्ड लोन में एसेट क्वालिटी को लेकर चिंताएं। छोटे NBFCs को फंड जुटाने में ज्यादा दिक्कतें आ सकती हैं।
Sammaan Capital की चुनौतियां: पुरानी मुश्किलें और सेक्टर की राहें
लेकिन इन सबके बीच Sammaan Capital के सामने अपनी पुरानी मुश्किलों और कंपनी के इतिहास को पार करने की बड़ी चुनौती होगी। Indiabulls Housing Finance के तौर पर कंपनी ने काफी मुश्किल दौर देखा है। हाल ही में जनवरी 2025 में ₹1,300 करोड़ के Qualified Institutional Placement (QIP) के बाद भी स्टॉक में करीब 7.5% की गिरावट आई थी। कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जहां पिछले 3 सालों में ROE 0.96% तक गिर गया था, और एक बार तो यह -8.66% नेगेटिव था, जबकि दूसरी बार 4.62% पॉजिटिव भी रहा। मार्च 2026 के लिए एक रिपोर्ट में नेगेटिव P/E रेश्यो -4.06 का भी जिक्र है, जो मौजूदा मार्केट रेश्यो से अलग है। ऐसे में कंपनी को अब इन सब से पार पाकर अपनी वैल्यू साबित करनी होगी।