GIFT City को ग्लोबल फाइनेंशियल हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत, कंपनियां अब पारंपरिक IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) के बिना सीधे GIFT City के एक्सचेंजों पर लिस्ट हो सकेंगी।
बिना IPO के लिस्टिंग का रास्ता खुला
IFSCA का यह नया प्रस्ताव उन स्थापित कंपनियों के लिए लाया गया है जो प्राइवेट कैपिटल के ज़रिए आगे बढ़ी हैं और जिन्हें नए फंड जुटाने की तत्काल आवश्यकता नहीं है, लेकिन वे पब्लिक होने का रुतबा, पारदर्शिता और लिक्विडिटी (Liquidity) हासिल करना चाहती हैं।
कौन सी कंपनियां होंगी पात्र?
बाजार की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए, इस डायरेक्ट लिस्टिंग के लिए कुछ वित्तीय शर्तें रखी गई हैं। कंपनी को पिछले फाइनेंशियल ईयर में कम से कम $20 मिलियन का ऑपरेटिंग रेवेन्यू (Operating Revenue) दिखाना होगा, या पिछले तीन सालों का औसत $20 मिलियन होना चाहिए। इसके अलावा, $1 मिलियन के प्री-टैक्स प्रॉफिट (Pre-tax Profit) वाली कंपनियां भी पात्र होंगी। निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए, लिस्टिंग के बाद मिनिमम मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) $50 मिलियन रखा गया है, जो कि IFSC में स्टैंडर्ड पब्लिक ऑफर के लिए निर्धारित ज़रूरत से दोगुना है।
शेयर की कीमत कैसे तय होगी?
चूंकि यह रास्ता पारंपरिक बुक-बिल्डिंग (Book-building) प्रक्रिया से अलग है, IFSCA ने शेयर की कीमत तय करने के लिए एक अलग तरीका सुझाया है। कंपनियों को एक रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट बैंकर (Investment Banker) द्वारा तैयार की गई एक इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (Information Document) जमा करनी होगी, जिसमें बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति, मैनेजमेंट और जोखिमों का विवरण होगा। बेस लिस्टिंग प्राइस (Base Listing Price) एक इंडिपेंडेंट वैल्यूएशन रिपोर्ट (Independent Valuation Report) के ज़रिए तय की जाएगी। ट्रेडिंग के पहले दिन एक स्पेशल प्री-ओपन ऑक्शन (Pre-open Auction) होगा, जिससे वास्तविक मार्केट प्राइस (Market Price) पता चल सकेगा। स्टॉक में लिस्टिंग के बाद लिक्विडिटी बनी रहे, इसके लिए रेगुलेटर ने मार्केट मेकर्स (Market Makers) की नियुक्ति का भी सुझाव दिया है।
कंपनियों को होंगे ये फायदे
यह पहल फाउंडर्स, वेंचर कैपिटल (Venture Capital) और प्राइवेट इक्विटी (Private Equity) इन्वेस्टर्स के लिए एग्जिट (Exit) का एक कारगर तरीका प्रदान करेगी। पारंपरिक IPO की लंबी और महंगी प्रक्रिया से बचकर, कंपनियां अंडरराइटिंग फीस (Underwriting Fees) और मौजूदा स्टेक के डाइल्यूशन (Dilution) से बच सकेंगी।
ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप
इस फ्रेमवर्क के ज़रिए, IFSCA GIFT City को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE), नैस्डैक (Nasdaq) और लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल सेंटर्स के बराबर लाने की कोशिश कर रहा है, जहाँ डायरेक्ट लिस्टिंग की सुविधा पहले से मौजूद है। Spotify, Coinbase और Palantir जैसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां पहले ही इस रूट का इस्तेमाल कर चुकी हैं। हालांकि, भारतीय कंपनियों को लिस्टिंग के बाद मिनिमम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Public Shareholding) बनाए रखनी होगी। रेगुलेटर ने 3 अगस्त तक इस प्रस्ताव पर जनता से प्रतिक्रिया मांगी है, जिसके बाद अंतिम गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
