IFSCA ने GPUs और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधिकारिक तौर पर 'फाइनेंशियल प्रोडक्ट' का दर्जा दे दिया है। इस बदलाव से GIFT City में अब कंपनियां महंगे AI हार्डवेयर को खरीदने के बजाय लीज पर ले सकेंगी, जिससे भारी कैपिटल खर्च में कमी आएगी।
नियम में क्या है बदलाव?
इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने 29 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी एक महत्वपूर्ण नियम जारी किया है। इसके तहत अब GPUs और संबंधित डेटा सेंटर इक्विपमेंट को 'फाइनेंशियल प्रोडक्ट' माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि GIFT City के भीतर काम करने वाली फाइनेंस कंपनियां अब AI हार्डवेयर के लिए ऑपरेटिंग और हाइब्रिड लीजिंग मॉडल पेश कर सकेंगी।
कंपनियों को कैसे मिलेगा फायदा?
अब तक AI डेटा सेंटर बनाने के लिए कंपनियों को भारी भरकम रकम खर्च कर हार्डवेयर खरीदना पड़ता था। लेकिन अब वे एयरक्राफ्ट और जहाजों की तरह AI सर्वर्स को लीज पर ले सकेंगी। इससे कंपनियों का कैश फ्लो सुरक्षित रहेगा और बैलेंस शीट पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। सरकार का मुख्य मकसद भारत में AI-रेडी कंप्यूट पावर की क्षमता को बढ़ाना और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks)
हालांकि यह एक क्रांतिकारी कदम है, लेकिन निवेशकों और कंपनियों को कुछ जोखिमों को भी समझना होगा:
- तकनीकी बदलाव (Obsolescence): AI की दुनिया में चिप्स बहुत तेजी से पुराने हो जाते हैं। अगर कोई कंपनी पुरानी जनरेशन के GPUs लीज पर लेती है, तो उसकी वैल्यू तेजी से गिर सकती है।
- सप्लाई चेन और करेंसी रिस्क: हार्डवेयर पूरी तरह से इम्पोर्ट पर निर्भर है। ऐसे में विदेशी मुद्रा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें कॉन्ट्रैक्ट्स की लागत को प्रभावित कर सकती हैं।
अभी यह ढांचा फिजिकल इक्विपमेंट लीजिंग पर केंद्रित है, न कि 'GPU-as-a-Service' मॉडल पर। भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि फाइनेंस कंपनियां इन जटिल संपत्तियों को मैनेज करने में कितनी महारत हासिल करती हैं।
