IFCI Share Price: NSE IPO की रेस में 'छुपा रुस्तम'! कंपनी के शेयर **11%** उड़े, पर असली कहानी क्या?

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AuthorAditya Rao|Published at:
IFCI Share Price: NSE IPO की रेस में 'छुपा रुस्तम'! कंपनी के शेयर **11%** उड़े, पर असली कहानी क्या?
Overview

IFCI Ltd. के शेयर शुक्रवार को **11%** की छलांग लगाते हुए **₹59.83** पर पहुंच गए। शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद IFCI ने शानदार प्रदर्शन किया। यह तेजी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO की खबरों के बाद आई है, जिसमें IFCI की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी **₹12,000-₹25,000 करोड़** के बीच आंकी गई है।

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NSE IPO की खबर से IFCI में तूफानी तेजी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने लंबे समय से प्रतीक्षित IPO के लिए रिकॉर्ड 20 इन्वेस्टमेंट बैंकों को हायर किया है। इस खबर का सीधा असर IFCI के शेयरों पर दिखा, जो शुक्रवार को 11% तक उछले, जबकि Nifty 50 में गिरावट दर्ज की गई। यह साफ दर्शाता है कि निवेशकों का ध्यान IFCI की अपनी वित्तीय सेहत से ज्यादा NSE में उसकी अहम हिस्सेदारी पर है।

IFCI की वैल्यू NSE में हिस्सेदारी से जुड़ी

IFCI की असली ताकत NSE में उसकी अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी से आती है। कंपनी के पास Stock Holding Corporation of India (SHCIL) का 52.86% हिस्सा है, जो खुद NSE का लगभग 4.4% रखती है। NSE के अनलिस्टेड शेयरों के भाव ₹2,100-₹2,325 के बीच चल रहे हैं, जिससे IFCI की इस हिस्सेदारी का मूल्य ₹12,000 करोड़ से ₹25,000 करोड़ तक हो सकता है। मार्च 2026 की शुरुआत में IFCI का मार्केट कैप लगभग ₹14,500 करोड़ था, जो दर्शाता है कि NSE की हिस्सेदारी उसकी कुल वैल्यू का एक बड़ा हिस्सा है।

कंपनी के फंडामेंटल्स चिंताजनक

हालांकि, IFCI की अपनी वित्तीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। कंपनी का P/E रेश्यो 21.89x से 47.88x के बीच है। यह Power Finance Corporation (P/E ~4.07x), REC (P/E ~5.11x), और IREDA (P/E ~17.47x) जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी अधिक है, और फाइनेंस इंडस्ट्री के औसत 16-22x से भी ऊपर है। IFCI का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी लगातार कम रहा है, जो 0.71% और 4.88% के बीच है। यह दर्शाता है कि कंपनी अपने कैपिटल का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रही है। पिछले तीन से पांच सालों में शेयर में 400% से अधिक की तेजी के बावजूद, IFCI ने दिसंबर 2025 तिमाही में ₹10.30 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया था। नेट सेल्स में भी गिरावट आई थी। यह प्रदर्शन NSE की हिस्सेदारी को लेकर बाजार के उत्साह के बिल्कुल विपरीत है।

ब्रोकरेज की 'Sell' रेटिंग

MarketsMOJO जैसी फर्मों ने IFCI को 'Sell' रेटिंग दी है, जिसका कारण कंपनी की खराब क्वालिटी मेट्रिक्स और कमज़ोर लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल हैं। बार-बार कम ROE और हालिया घाटे, IFCI की लाभप्रदता पर सवाल उठाते हैं, खासकर NSE IPO की कहानी के बिना।

आगे क्या?

IFCI के शेयर का भविष्य काफी हद तक NSE के IPO की प्रगति और उसकी सफलता पर निर्भर करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि SHCIL जैसी सहायक कंपनियों को सीधे IFCI में मिलाने से NSE की हिस्सेदारी का वैल्यू अनलॉक हो सकता है। हालांकि, NSE की लिस्टिंग में कोई भी देरी या समस्या IFCI के अपने बिज़नेस की कमजोरियों को उजागर कर सकती है। IPO के उत्साह से परे, IFCI को अपने वित्तीय प्रदर्शन और लाभप्रदता में सुधार करना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.