IFCI Limited ने दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही (Q3 FY26) के लिए अपने अन-ऑडिटेड वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹6.85 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में हुए ₹193.36 करोड़ के घाटे की तुलना में एक बड़ा उलटफेर है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू (Revenue) में भी 53.56% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹298.80 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के मुताबिक, यह बढ़ोतरी डिविडेंड इनकम (dividend income), फेयर वैल्यू गेन्स (fair value gains) और फाइनेंस कॉस्ट (finance costs) में कमी के कारण संभव हुई।
कंसॉलिडेटेड (Consolidated) आधार पर भी IFCI ने ₹20.87 करोड़ का PAT दर्ज किया, जो पिछले साल की Q3 में ₹8.74 करोड़ के घाटे से बेहतर है। हालांकि, कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू करीब ₹455.86 करोड़ पर सपाट रहा, जबकि खर्चों में 23.75% की बढ़ोतरी हुई, जिसका मुख्य कारण फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स पर इंपेयरमेंट चार्जेज (impairment charges) का बढ़ना है।
एक और अहम खबर यह है कि कंपनी को जनवरी 2025 में भारत सरकार से शेयर कैपिटल (Share Capital) के लिए ₹500 करोड़ मिले हैं। इसके अलावा, IFCI ग्रुप के कंसॉलिडेशन (consolidation) की योजना को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।
ऑडिटर की गंभीर चेतावनी (Auditor's Alarming Red Flags)
हालांकि, कंपनी के नतीजों पर इंडिपेंडेंट ऑडिटर की रिपोर्ट ने गंभीर चिंताएं जताई हैं, जो मुनाफे के उलटफेर पर भारी पड़ रही हैं:
- प्रोविजनिंग गैप (Provisioning Gap): RBI के नियमों और Ind AS 109 के बीच ₹89.10 करोड़ का प्रोविजनिंग गैप पाया गया है।
- नेगेटिव CRAR (Negative CRAR): कैपिटल रिस्क एडिक्वेसी रेश्यो (Capital Risk Adequacy Ratio) -16.51% पर है, जो RBI के तय मानकों से काफी नीचे है।
- ग्रॉस एनपीए (Gross NPA): कंपनी का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेश्यो 96.31% के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है।
- हितों का टकराव (Conflict of Interest): SDF स्कीम के लिए कंपनी की एडवाइजरी भूमिका में हितों के टकराव की चिंताएं भी जताई गई हैं।
जोखिम और आगे की राह (Risks & Outlook)
सरकारी निवेश और PAT में वापसी अच्छे संकेत हैं, लेकिन 96.31% का भारी-भरकम ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) कंपनी की एसेट क्वालिटी (asset quality) को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। नेगेटिव CRAR बताता है कि कंपनी के पास भविष्य के नुकसान को झेलने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है। प्रोविजनिंग गैप पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। IFCI ग्रुप के कंसॉलिडेशन से रणनीतिक लाभ हो सकता है, लेकिन यह इन वित्तीय और परिचालन चुनौतियों को दूर करने पर निर्भर करेगा। निवेशकों को नियामकीय कार्रवाई (regulatory actions) और कंपनी की इन मुश्किल संपत्तियों को संभालने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इन बड़े अंतर्निहित जोखिमों के कारण आगे का रास्ता सावधानी भरा लग रहा है।