अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) दिसंबर तक भारत के MSME सेक्टर के लिए **$2.5 अरब से $3 अरब** जुटाने की योजना बना रहा है। इस पहल का लक्ष्य डिजिटल लेंडिंग, सप्लाई-चेन फाइनेंसिंग और AI-आधारित क्रेडिट असेसमेंट के ज़रिए रोज़गार सृजन को बढ़ावा देना है। चूँकि भारत IFC के वैश्विक पोर्टफोलियो का **12%** हिस्सा रखता है, यह कदम देश में निजी पूंजी वृद्धि के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Detailed Coverage
MSME फाइनेंसिंग पर खास ध्यान
वर्ल्ड बैंक ग्रुप की प्राइवेट-सेक्टर शाखा, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) ने भारत के छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर को समर्थन देने के लिए एक आक्रामक रणनीति बनाई है। दिसंबर 2026 तक, संस्था भारतीय MSMEs के लिए $2.5 अरब से $3 अरब के बीच जुटाने का इरादा रखती है। यह प्रयास रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसे IFC दक्षिण एशिया के आर्थिक विकास के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता मानता है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, IFC पारंपरिक लेंडिंग मॉडल से हटकर काम कर रहा है। इसके बजाय, यह नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs), डिजिटल लेंडर्स और सप्लाई-चेन फाइनेंस प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर काम कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग क्रेडिट असेसमेंट और रिस्क-शेयरिंग मैकेनिज़्म को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा, जिसका उद्देश्य उन व्यवसायों तक पहुँचना है जिन्हें पारंपरिक बैंकों से फंडिंग हासिल करने में ऐतिहासिक रूप से कठिनाई हुई है। ये टेक्नोलॉजी-संचालित समाधान कैश फ्लो पर आधारित लेंडिंग को लेंडर्स के लिए अधिक टिकाऊ और छोटे व्यवसायों के लिए सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
वैश्विक पोर्टफोलियो में भारत का स्थान
भारत वर्तमान में IFC के लिए सबसे बड़ा कंट्री एक्सपोज़र है, जिसका पोर्टफोलियो लगभग $12 अरब का है। यह संगठन की वैश्विक होल्डिंग्स का लगभग 12% और उसके कुल वैश्विक इक्विटी निवेश का 23% है। मौजूदा वर्ल्ड बैंक ग्रुप कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत, भारत से 2030 तक $20 अरब से अधिक का समर्थन प्राप्त करने की उम्मीद है, जिसमें IFC विशेष रूप से उस कुल राशि में से $10 अरब से अधिक निजी पूंजी जुटाने का लक्ष्य रखता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और एग्री-कनेक्ट पहलें
MSME फाइनेंसिंग के अलावा, IFC भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नव लॉन्च किया गया एग्री-कनेक्ट प्रोग्राम एक फ्लैगशिप पहल है जिसे विश्व स्तर पर 30 करोड़ किसानों की आय में सुधार के लिए डिज़ाइन किया गया है। अपने पहले चरण में, यह प्रोग्राम भारत और पड़ोसी देशों के 8.8 करोड़ किसानों पर केंद्रित है, जिसमें बेहतर बाज़ार पहुँच और डिजिटल फार्म टेक्नोलॉजी पर ज़ोर दिया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भी एक प्राथमिकता बनी हुई है। IFC पहले ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे डेटा सेंटरों में लगभग $700 मिलियन का निवेश कर चुका है। संगठन शहरी विकास के लिए दीर्घकालिक फंडिंग तक पहुँचने में शहरों की मदद करने के लिए म्युनिसिपल फाइनेंसिंग मॉडल भी तलाश रहा है, जिसे हाल ही में विशाखापत्तनम में स्वच्छता परियोजनाओं द्वारा प्रदर्शित किया गया है।
'इंडिया अब्रॉड' मॉडल
रीजनल वाइस प्रेसिडेंट सर्वेश सूरी के नेतृत्व में, IFC 'इंडिया अब्रॉड' रणनीति लागू कर रहा है। इसमें डिजिटल और वित्तीय क्षेत्रों में सफल भारतीय नवाचारों को लेना और उन्हें अन्य उभरते बाजारों में उपयोग के लिए अनुकूलित करना शामिल है। संस्था अपने विकास लक्ष्यों को 'ट्रिपल बॉटम लाइन' दृष्टिकोण के साथ संतुलित करती है, जिसके लिए सभी निवेशों का पर्यावरण और सामाजिक रूप से जिम्मेदार होना आवश्यक है, साथ ही वित्तीय रूप से टिकाऊ भी बने रहना है।
निवेशक और बाज़ार सहभागियों को आने वाली तिमाहियों में इस लिक्विडिटी मोबिलाइजेशन का छोटे भारतीय फर्मों के लिए क्रेडिट उपलब्धता पर प्रभाव देखने को मिल सकता है। IFC की इन डिजिटल और सप्लाई-चेन लेंडिंग मॉडल को सफलतापूर्वक स्केल करने की क्षमता एक प्रमुख कारक बनी हुई है, जिस पर देश भर में निजी-क्षेत्र के रोज़गार का समर्थन करने के प्रयास में नज़र रखी जानी चाहिए।
